पाकिस्तानी आतंकियों ने जब कश्मीर में निहत्थे पर्यटकों पर हमला किया, तो भारत ने इसका जवाब Operation Sindoor के तौर पर दिया। आतंक के खिलाफ भारत का यह अभियान सिर्फ पाकिस्तान पोषित आतंकी ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान के दर्जनों अहम सैन्य ठिकानों को भी ध्वस्त किया।
दुनियाभर के डिफेंस एक्सपर्ट्स के बीच आतंक के खिलाफ भारत की जवाबी कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई, क्योंकि पाकिस्तान असल में अमेरिका, चीन और तुर्किये जैसे देशों से मिले टेक्निकल, इंटेलिजेंस और वेपन सपोर्ट के दम पर भारत को चुनौती दे रहा था, लेकिन भारत ने स्वदेशी हथियारों के दम पर महज कुछ घंटों में पाकिस्तान के उन आतंकी और सैन्य ठिकानों को रौंद दिया, जिनका इस्तेमाल भारत पर हमलों के लिए किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपने स्वदेशी मल्टी लेयर्ड डिफेंस सिस्टम से न केवल पाकिस्तानी हमलों को पूरी तरह नाकाम किया, बल्कि ऐसे करारे हमले किए कि पाकिस्तान आज तक भी इस चोट से नहीं उबर पाया है। खासतौर पर नूर खान एयरबेस पर किया गया भारतीय हमला
ब्रह्मोस और आकाश बने गेम चेंजर
सेना और रक्षा मंत्रालय की तरफ से अलग-अलग मौकों पर दी गई जानकारी के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया। ब्रह्मोस की मैक 3 तक की रफ्तार और बेहद सटीक हमलों ने पाकिस्तान के एयरबेस और आतंकी लॉन्चपैड्स को भारी नुकसान पहुंचाया। वहीं, आकाश मिसाइल सिस्टम ने पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने में 100% सफलता दिखाई। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी ने भी दुश्मन की जवाबी कार्रवाई को लगभग बेअसर कर दिया। भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए गेम चेजिंग रहा। इसके बाद से दुनियाभर में भारत के इन हथियारों की डिमांड बढ़ी है।
डिफेंस एक्सपोर्ट रिकॉर्ड हाई पर
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय डिफेंस टेक की ताकत देखने के बाद भारतीय हथियारों पर दुनिया का भरोसा तेजी से बढ़ा है। इसका असर सीधे रक्षा निर्यात के आंकड़ों में दिखा। भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹38,424 करोड़ पर पहुंच गया, जो ऑल टाइम हाई पर है और पिछले साल के मुकाबले 62.66% ज्यादा है। भारत अब 100 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण बेच रहा है। फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल की सप्लाई हो रही है, जबकि आर्मेनिया ने आकाश मिसाइल सिस्टम और पिनाका रॉकेट सिस्टम खरीदे हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीकी देशों से भी भारतीय हथियारों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
| निर्यात पैरामीटर | वित्त वर्ष 2024-25 | वित्त वर्ष 2025-26 | परिवर्तन (%) |
| कुल निर्यात मूल्य | ₹23,622 करोड़ | ₹38,424 करोड़ | +62.66% |
| सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) का हिस्सा | हां | ₹21,071 करोड़ (54.84%) | +151% (YoY) |
| निजी क्षेत्र का हिस्सा | हां | ₹17,353 करोड़ (45.16%) | +14% (YoY) |
| निर्यातक कंपनियों की संख्या | 128 | 145 | +13.3% |
| गंतव्य देशों की संख्या | 80+ | 100+ | + 20 |
आतंकी ठिकानों पर किन हथियारों से किया हमला?
डिफेंस मिनिस्ट्री की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान और PoJK में मौजूद आतंकी ठिकानों पर अत्याधुनिक हथियारों से सटीक हमले किए। बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय को ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और स्कैल्प मिसाइल से निशाना बनाया गया, जिन्हें Su-30MKI और राफेल लड़ाकू विमानों से दागा गया। वहीं, मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों पर स्कैल्प, क्रिस्टल मेज और ब्रह्मोस मिसाइलों से हमला हुआ। मुजफ्फराबाद के आतंकी शिविरों पर जगुआर और मिराज-2000 विमानों से लेजर गाइडेड बम और HAMMER बम गिराए गए। कोटली के गुलपुर प्रशिक्षण शिविर को स्काईस्ट्राइकर और नागास्त्र-1 जैसे आत्मघाती ड्रोन से तबाह किया गया, जबकि सियालकोट के सरजल शिविर पर भारतीय सेना के तोपखाने ने स्मर्च रॉकेट और पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर से भारी गोलाबारी की।
| लक्ष्य (स्थान) | आतंकी संगठन | प्रयुक्त मुख्य हथियार | डिलीवरी प्लेटफॉर्म |
| बहावलपुर (पंजाब, पाकिस्तान) | जैश-ए-मोहम्मद (JeM) मुख्यालय | ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, स्कैल्प (SCALP) | Su-30MKI, राफेल |
| मुरीदके (पंजाब, पाकिस्तान) | लश्कर-ए-तैयबा (LeT) मुख्यालय | स्कैल्प, क्रिस्टल मेज, ब्रह्मोस | राफेल, मिराज-2000 |
| मुजफ्फराबाद (PoJK) | सैयदना बिलाल मस्जिद/शिविर | लेजर गाइडेड बम, हैमर (HAMMER) | जगुआर, मिराज-2000 |
| कोटली (PoJK) | गुलपुर प्रशिक्षण शिविर | स्काईस्ट्राइकर, नागास्त्र-1 | मानव रहित हवाई प्रणाली (UAS) |
| सियालकोट (पाकिस्तान) | सरजल शिविर | स्मर्च रॉकेट, पिनाका | भारतीय सेना तोपखाना |
डिफेंस कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी
ऑपरेशन सिंदूर का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया। रक्षा क्षेत्र की कंपनियों में निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), GRSE और सोलर इंडस्ट्रीज जैसे शेयरों ने शानदार रिटर्न दिए। BEL का शेयर एक साल में 36% से ज्यादा चढ़ा, जबकि GRSE में करीब 59% की तेजी दर्ज की गई। सोलर इंडस्ट्रीज भी 16% से ज्यादा उछला। विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का लगातार बढ़ता रक्षा बजट और मजबूत ऑर्डर बुक इस सेक्टर को आगे भी सपोर्ट करेगा।
| हथियार | निर्माता / कंपनी | भूमिका |
|---|---|---|
| ब्रह्मोस | ब्रह्मोस एयरोस्पेस | सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल |
| आकाश मिसाइल सिस्टम | बीडीएल, बीईएल, DRDO | वायु रक्षा प्रणाली |
| नागास्त्र-1 | सोलर इंडस्ट्रीज | लोइटरिंग म्युनिशन / आत्मघाती ड्रोन |
| D-4 एंटी-ड्रोन सिस्टम | बीईएल, DRDO | एंटी-ड्रोन रक्षा प्रणाली |
| पिनाका | DRDO, भारतीय रक्षा उद्योग | मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर |
| आकाशतीर (Akashteer) | बीईएल | कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम |

ऑपरेशन सिंदूर ने बदल दिया डिफेंस सेक्टर का रुख
Make In India की सबसे बड़ी परीक्षा में पास
ऑपरेशन सिंदूर को भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘Make In India’ मिशन की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। युद्ध जैसी परिस्थितियों में भारतीय हथियारों ने जिस तरह प्रदर्शन किया, उससे भारत की रक्षा निर्माण क्षमता पर वैश्विक भरोसा मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि ‘बैटल टेस्टेड’ भारतीय हथियार अब दुनिया के लिए पश्चिमी देशों के महंगे रक्षा सिस्टम का मजबूत विकल्प बन सकते हैं। यही वजह है कि भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के टॉप डिफेंस एक्सपोर्टर्स में शामिल होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
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