नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC) ने देश को ऊर्जा आयात की बेडियों से आजादी दिलाने के लिए ब्लूप्रिंट पेश किया है। इसके तहत कंपनी
देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए खासतौर पर न्यूक्लियर एनर्जी का उत्पादन बढ़ाने पर जोर देगी। कंपनी की तरफ से जारी किए गए एक ऑफिशियल नोट में CMD गुरदीप सिंह ने एलान किया है कि 2047 तक भारत ने जो 100 GW न्यूक्लियर एनर्जी उत्पादन का विजन रखा है, उसा पूरा करने के लिए NTPC अकेले करीब 30 GW की क्षमता खुद विकसित करेगी। NTPC का यह बयान बेहद महत्वाकांक्षी है, क्योंकि फिलहाल भारत की कुल परमाणु ऊर्जा क्षमता महज 9 GW के आसपास है। यानी अकेले NTPC देश की मौजूदा राष्ट्रीय क्षमता से कई गुना बड़ा न्यूक्लियर पोर्टफोलियो बनाने की तैयारी कर रही है।
कैसे इतना बड़ा लक्ष्य होगा हासिल?
NTPC ने अपने इस महाप्लान को जमीन पर उतारने के लिए बेहद व्यावहारिक और नीतिगत रोडमैप पेश किया है। इसके तहत कंपनी देश में बंद हो रहे पुराने थर्मल (कोयला) पावर प्लांट्स की जमीन का इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए करने की तैयारी कर रही है। इन पुरानी साइट्स पर पहले से ही जमीन, पानी और ग्रिड कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे नए न्यूक्लियर प्लांट स्थापित करना बेहद आसान और कम जोखिम वाला होगा। इस बड़े विस्तार और साइटों की पहचान के लिए कंपनी देश के 14 राज्यों के साथ गंभीर बातचीत के दौर में है।
स्वदेशी तकनीक पर दांव
कंपनी की तरफ से जारी इस दस्तावेज में सबसे अहम बात यह बताई गई है कि NTPC स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMR) के बजाय बड़े रिएक्टर्स पर दांव लगाएगी। इससे भी बड़ी बात यह है कि कंपनी विदेशी तकनीक की जगह स्वदेशी तकनीक पर दांव लगाएगी। कंपनी का मानना है कि ग्रिड सप्लाई मॉडल के लिए बड़े न्यूक्लियर प्लांट ही सबसे ज्यादा उपयोगी हैं। इसके साथ ही इस दस्तावेज में कहा गया है कि विदेशी टेक्नोलॉजी की जगह आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जाएगा। अगर शुरुआती दौर में घरेलू या स्वदेशी विकल्प 5 से 10% महंगे भी हों, तब भी भारत को अपनी टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन बनाने पर जोर देगा।
न्यूक्लियर एनर्जी सुरक्षित
इस दस्तावेज में बताया गया है कि NTPC फिलहाल 14 राज्यों के साथ न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स को लेकर बातचीत कर रही है। इससे यह पता चलता है कि कंपनी बड़े पैमाने पर न्यूक्लियर एनर्जी की साइट्स की पहचान और आगे की तैयारी में जुटी है। इसके साथ ही इसमें एक अहम मुद्दा यह भी उठाया गया है कि आम लोगों के बीच न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट्स को लेकर डर रहता है। लेकिन, उन्हें यह समझाना जरूरी है कि न्यूक्लियर एनर्जी सेफ है। इसके लिए कंपनी ने राज्यों के सहयोग की मांग भी की है।
