NSE IPO TOP FACTS : भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा धमाका होने जा रहा है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने करीब एक दशक (10 साल) के लंबे इंतजार और कई नियामक बाधाओं को पार करने के बाद आखिरकार बुधवार देर रात अपने आईपीओ (IPO) के लिए सेबी (SEBI) के पास ड्राफ्ट पेपर (DRHP) जमा कर दिए हैं।
1. इतिहास का सबसे बड़ा IPO
बाजार के अनुमानों के मुताबिक, इस इश्यू के जरिये 25,000 करोड़ से 30,000 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। अगर यह अनुमान सच साबित होता है, तो यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर होगा।
2. हुंडई और LIC का रिकॉर्ड टूटेगा
यह इश्यू 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ और 2022 में आए LIC 21,008 करोड़ रुपये के आईपीओ को पीछे छोड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल Jio Platforms IPO का DRHP भी दाखिल हो चुका है। यह IPO भी करीब इतना ही बड़ा हो सकता है।
3. ₹5 लाख करोड़ से ज्यादा वैल्यूएशन
NSE ने लगभग 6% हिस्सेदारी (14.89 करोड़ शेयर) बेचने के लिए ड्राफ्ट पेपर फाइल किए हैं। यदि 6% हिस्सेदारी के लिए ₹30,000 करोड़ जुटाए जाते हैं, तो पूरी कंपनी की मार्केट वैल्यू ₹5 लाख करोड़ (₹5 Trillion) के पार निकल जाएगी।
4. टॉप-10 मूल्यवान कंपनियों में एंट्री
₹5 लाख करोड़ की वैल्यूएशन के साथ ही NSE सीधे भारत की टॉप-10 सबसे मूल्यवान लिस्टेड कंपनियों में शामिल हो जाएगा। यह दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस (₹4.6 लाख करोड़) को भी पीछे छोड़ देगा।
5. पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (Pure OFS)
यह आईपीओ पूरी तरह से एक ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि कंपनी कोई नया शेयर जारी करके फ्रेश कैपिटल नहीं जुटाएगी, बल्कि इसके मौजूदा प्रमोटर्स और शुरुआती निवेशक अपनी हिस्सेदारी आम जनता को बेचेंगे।
6. अनलिस्टेड शेयरों को लेकर मार्केट में क्रेज
Grey Market में NSE के शेयरों को लेकर निवेशकों में जबरदस्त क्रेज है। फिलहाल ₹2,035 प्रति शेयर के आसपास ट्रेड कर रहे हैं, जो इसके आईपीओ के प्रति निवेशकों के भारी उत्साह को दर्शाता है।
7. मार्केट में एकछत्र राज
NSE का भारतीय शेयर बाजार पर पूरी तरह दबदबा है। FY26 के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी का कैश इक्विटी (Cash Market) में 92.99% मार्केट शेयर है। इसके साथ ही इक्विटी फ्यूचर्स (Futures) में 99.79% मार्केट शेयर है। वहीं, इक्विटी ऑप्शंस (Options) में 74.71% मार्केट शेयर है। कंपनी सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि ग्लोबल मार्केट्स में भी लीडर है। लगातार 7 वर्षों से NSE दुनिया का सबसे बड़ा इक्विटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंज बना हुआ है।
8. धमाकेदार कमाई और मुनाफा
NSE की वित्तीय सेहत बेहद मजबूत है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में NSE का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर ₹16,601 करोड़ रहा (FY24 में ₹14,780 करोड़ था)। वहीं कंपनी का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) बढ़कर ₹10,302 करोड़ पर पहुंच गया है।
9. प्रतिद्वंदी के घर में लिस्टिंग
नियमों के मुताबिक, कोई भी स्टॉक एक्सचेंज खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता। इसलिए, NSE के शेयरों की लिस्टिंग उसके धुर-प्रतिद्वंदी BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) पर होगी। ठीक वैसे ही जैसे BSE के शेयर NSE पर लिस्टेड हैं।
10. एक दशक का लंबा इंतजार खत्म
NSE ने पहली बार दिसंबर 2016 में ₹10,000 करोड़ के आईपीओ के लिए पेपर फाइल किए थे। लेकिन उसके तुरंत बाद 'को-लोकेशन स्कैम' (Co-location Controversy) सामने आ गया, जिसके कारण यह आईपीओ पिछले 10 साल से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था।
क्या अब भी आ सकती है कोई रुकावट?
NSE के DRHP के मुताबिक अब भी इस मेगा आईपीओ की राह पूरी तरह निष्कंटक नहीं है। ड्राफ्ट पेपर्स में तीन ऐसी बड़ी कानूनी पेचीदगियों और रुकावटों का खुलासा हुआ है, जो इसके प्रोसेस को अब भी लटका सकती हैं।
1. बॉम्बे हाई कोर्ट में IPO पर स्टे की मांग : NSE के DRHP के मुताबिक, बॉम्बे हाई कोर्ट में परिणय शर्मा नाम के एक निवेशक ने जनहित याचिका दायर कर आईपीओ की प्रक्रिया पर तुरंत रोक (Stay) लगाने की मांग की है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि NSE में करीब 43.7% विदेशी हिस्सेदारी है, जिसमें पारदर्शिता की भारी कमी है। NSE में मॉर्गन स्टेनली और सिटीग्रुप ने मॉरीशस के रास्ते शेल कंपनियों के जरिये निवेश किया है। MS Strategic, Citigroup Strategic Holdings, DVI Fund का NSE में बड़ा निवेश है। इन कंपनियों के असली मालिकों (Ultimate Beneficial Owners) की पहचान छिपी हुई है। IPO के जरिए ये निवेशक बेहद कम दाम में खरीदे गए NSE के शेयरों को बहुत ऊंची कीमत पर रिटेल निवेशकों में डंप करना चाहते हैं। इसमें पार्टिसिपेटरी नोट्स (P-Notes) का इस्तेमाल कर भारतीय पैसे को ही बाहर भेजकर वापस लाने (Round-Tripping) का संदेह भी जताया गया है। इस मामले की सुनवाई 24 जून 2026 को होने वाली है।
2. सेबी सेटलमेंट और करोड़ों के कानूनी दावे : DRHP से यह भी पता चला है कि नियामक बाधाओं को खत्म करने के लिए NSE ने सेबी (SEBI) के सामने ₹1,491 करोड़ का एक सेटलमेंट प्रस्ताव रखा है, जिसे अभी अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। इसके अलावा, मद्रास स्टॉक एक्सचेंज (MSEI) का ₹857 करोड़ का एक कानूनी दावा भी लंबित है।
3. 5,000 'फ्री शेयर्स' का अजीबोगरीब क्रिमिनल केस : आईपीओ दस्तावेजों में एक बेहद दिलचस्प सिविल और क्रिमिनल केस का भी जिक्र है। दिसंबर 2023 में तकनीकी गलती के कारण कश्मीरी लाल राणा नामक व्यक्ति के डीमैट अकाउंट में NSE के 5,000 शेयर गलती से क्रेडिट हो गए थे। राणा ने गलती पकड़े जाने से पहले ही इनमें से 3,685 शेयर बाजार में बेच दिए और ₹1.32 करोड़ से ज्यादा रकम निकाल ली। इसके बाद नवंबर 2024 में कंपनी ने 4:1 का बोनस भी दे दिया। अब NSE और नुवामा वेल्थ ने दिल्ली हाई कोर्ट में सिविल सूट और मुंबई पुलिस में धोखाधड़ी (Cheating) का क्रिमिनल केस दर्ज कराया है। कोर्ट ने फिलहाल राणा को बचे हुए शेयर बेचने से रोक दिया है।
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