हर महीने सैलरी आने के बाद आप कुछ रकम बचाने की कोशिश तो करते हैं लेकिन साल के अंत में बैंक अकाउंट या निवेश में अंतर नजर नहीं आ रहा तो इसकी वजह आपकी कम कमाई नहीं है। कई बार छोटे-छोटे खर्च मिलकर बजट का बड़ा हिस्सा खत्म कर देते हैं। खास बात यह है कि इनमें से कुछ खर्च इतने छोटे होते हैं कि उनका हिसाब रखना जरूरी नहीं लगता। लेकिन सालभर की सेविंग्स पर इनका बड़ा असर पड़ने लगता है। अगर आप अपनी बचत बढ़ाना चाहते हैं तो कुछ खर्चों को ट्रैक करना शुरू कर सकते हैं-
ऑनलाइन शॉपिंग और छोटे ऑर्डर
ई-कॉमर्स ऐप पर बार-बार होने वाली छोटी खरीदारी बजट बिगाड़ सकती है। 300-500 रुपये की चीजें अलग-अलग देखने पर ज्यादा बड़ी रकम नहीं लगतीं, लेकिन पूरे साल में इनका कुल खर्च काफी बढ़ सकता है। कपड़े, एक्सेसरीज, घर का सामान या बार-बार होने वाली छोटी खरीदारी का अलग रिकॉर्ड रखें। हर महीने कितना खर्च करना है, इसके लिए पहले से बजट तय कर सकते हैं।
बाहर का खाना और फूड डिलीवरी
ऑफिस में लंच, शाम की चाय-कॉफी, स्नैक्स और फूड डिलीवरी पर होने वाला खर्च अक्सर बिना प्लानिंग के बढ़ जाता है। खासकर छोटी-छोटी रकम का रोजाना भुगतान महीने के अंत में बड़ा खर्च बन सकता है। इसलिए महीने में बाहर के खाने पर कितना पैसा जा रहा है, इसका हिसाब रखें। पहले ही योजना बना लें कि इस कैटेगरी के लिए हर महीने कितनी रकम इस्तेमाल करनी चाहिए।
सब्सक्रिप्शन और ऑटो-डेबिट
OTT प्लेटफॉर्म, म्यूजिक ऐप, क्लाउड स्टोरेज, जिम या दूसरे डिजिटल सब्सक्रिप्शन का पेमेंट हर महीने अपने आप हो सकता है। कई बार हम ऐसे सब्सक्रिप्शन के लिए भी भुगतान करते रहते हैं जिनका इस्तेमाल बहुत कम होता है। बैंक स्टेटमेंट में recurring payments चेक कर गैर-जरूरी सर्विस को बंद किया जा सकता है।
कैब-ऑटो के छोटे खर्च
रोजाना कैब, ऑटो, बाइक टैक्सी या छोटी दूरी के लिए ऑनलाइन ट्रांसपोर्ट लेने पर खर्च तेजी से बढ़ सकता है। इसी तरह बार-बार होने वाले डिलीवरी चार्ज और सुविधा शुल्क भी बजट में जुड़ते रहते हैं। महीने के अंत में इन सभी खर्चों को जोड़कर देखना जरूरी है। हर बार कैब लेने की बजाय कुछ मौकों पर मेट्रो का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
इम्पल्स शॉपिंग और अचानक होने वाले खर्च
सेल देखकर सामान खरीदना, कैफे में अचानक जाना या बिना जरूरत कोई छोटी चीज खरीद लेना भी बचत को प्रभावित कर सकता है। ऐसे खर्चों को अलग कैटेगरी में लिखें। इससे पता चलेगा कि पैसा वास्तव में जरूरतों पर जा रहा है या अचानक किए गए खर्चों पर।
