Link Property With Aadhaar : दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से नागरिकों की अचल और चल संपत्ति के दस्तावेजों को उनके आधार नंबर से लिंक करने की मांग वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा। केंद्र सरकार भ्रष्टाचार, काले धन और 'बेनामी' लेनदेन पर अंकुश लगाने के लिए अचल और चल संपत्ति के दस्तावेजों को आधार से लिंक कराना चाहती है। एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार के कई मंत्रालयों से जवाब तलब किया है।
इन मंत्रालयों से मांगा गया है जवाब
जस्टिस सतीश चंदर शर्मा और जस्टिस यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने सोमवार को वित्त मंत्रालय, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय और कानून मंत्रालय से इस मामले में जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति सतीश चंदर शर्मा ने याचिका पर अपना पक्ष साफ करने के लिए दिल्ली सरकार और गृह मंत्रालय को और अधिक समय दिया और कहा कि 'याचिका में अच्छे कारणों से मुद्दे उठाए गए हैं'। इससे पहले अदालत ने रेस्पोंडेंट्स को नोटिस जारी करते हुए याचिकाकर्ता को याचिका में बदलाव करने और इस मामले में ज्यादा संबंधित मंत्रालयों को शामिल करने के लिए कहा था।
क्या है याचिकाकर्ता की मांग
इस ममामले में केंद्र सरकार का पक्ष एडवोकेट मनीष मोहन और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने रखा। याचिकाकर्ता एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय खुद एक भाजपा नेता हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से चल-अचल संपत्ति के दस्तावेजों को आधार से लिंक करने के लिए निर्देश की मांग की है।
क्या हो सकता है फायदा
याचिका में कहा गया है कि अगर सरकार संपत्ति को आधार से लिंक करती है, तो इससे 2 प्रतिशत सालाना ग्रोथ होगी। इससे इलेक्टोरल प्रोसेस साफ-सुथरी होगी, जिसमें काला धन और बेनामी लेन-देन काफी अधिक चलन में है। इससे ब्लैक इंवेस्टमेंट के चक्र को बढ़ावा मिलता है, बेईमानी से लोग सत्ता पर काबिज होते हैं और ये सब नागरिकों के तिरस्कार के साथ किया जाता है। बताते चलें कि अब तक भारत में कई कानून बने हैं लेकिन उन्हें ठीक से लागू नहीं किया जा सका।
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