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शेयर या म्यूचुअल फंड नहीं, अब AIF है नया इन्वेस्टमेंट ट्रेंड! जानें क्या है AIF और कैसे करें इसमें निवेश की शुरुआत

AIF आज के समय में अमीर निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन गया है। इसमें रिस्क जरूर ज्यादा है, लेकिन रिटर्न भी पारंपरिक निवेशों से कहीं अधिक मिल सकता है। अगर आपके पास लंबी अवधि की सोच और पर्याप्त पूंजी है, तो AIF भविष्य का बड़ा निवेश ट्रेंड साबित हो सकता है।

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Mutual Fund

भारत में अब निवेश का तरीका तेजी से बदल रहा है। जहां पहले लोग शेयर, म्यूचुअल फंड या एफडी को ही निवेश का जरिया मानते थे, वहीं अब हाई नेटवर्थ इन्वेस्टर्स (HNI) की पसंद बन गया है AIF यानी Alternative Investment Fund। SEBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 तक AIF में कुल निवेश 14 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है जो पिछले साल के मुकाबले करीब 20% ज्यादा है। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर क्या है AIF और आप इसमें कैसे निवेश कर सकते हैं?

AIF क्या होता है?

AIF या अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड एक ऐसा इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म है जो पारंपरिक निवेश जैसे शेयर मार्केट या सरकारी बॉन्ड से अलग सेक्टर्स में पैसा लगाता है। ये फंड किसी ट्रस्ट, कंपनी या लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) के रूप में बनाए जाते हैं और SEBI के रेगुलेशन 2012 के तहत नियंत्रित होते हैं। इनमें आमतौर पर HNI, बड़ी कंपनियां या विदेशी निवेशक हिस्सा लेते हैं, क्योंकि ये फंड बड़े पैमाने पर पूंजी की मांग करते हैं।

AIF कैसे काम करता है?

AIF फंड्स का संचालन फंड मैनेजर करते हैं, जो निवेशकों से पूंजी जुटाकर तय रणनीति के तहत उसे विभिन्न प्रोजेक्ट्स या कंपनियों में लगाते हैं। इन फंड्स में पैसा एक साथ नहीं बल्कि जरूरत के हिसाब से चरणों में निवेश किया जाता है। निवेश की राशि आम तौर पर लंबी अवधि के लिए होती है, और पैसे की निकासी (withdrawal) तीन साल या उससे ज्यादा लॉक-इन पीरियड के बाद ही संभव होती है।

AIF की तीन कैटेगरी

1. कैटेगरी I AIF: ये फंड उन सेक्टर्स में निवेश करते हैं जिनका समाज और अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव होता है, जैसे — स्टार्टअप्स, SMEs, इंफ्रास्ट्रक्चर या ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स।

2. कैटेगरी II AIF: इसमें प्राइवेट इक्विटी, डेट और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर शामिल हैं। ये उन कंपनियों में निवेश करते हैं जो अभी लिस्टेड नहीं हैं लेकिन ग्रोथ की संभावनाएं रखती हैं।

3. कैटेगरी III AIF: इसमें हेज फंड्स शामिल होते हैं जो हाई रिस्क और शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट पर काम करते हैं। ये शेयर, कमोडिटी और विदेशी बाजारों में निवेश करते हैं।

कौन कर सकता है AIF में निवेश?

AIF में निवेश करने के लिए न्यूनतम राशि 1 करोड़ रुपये तय की गई है। हालांकि, फंड मैनेजर या उनके कर्मचारी 25 लाख रुपये से शुरुआत कर सकते हैं। इसमें भारतीय निवासी, NRI और विदेशी नागरिक निवेश कर सकते हैं, लेकिन आम खुदरा निवेशकों (retail investors) को इसकी अनुमति नहीं है।

निवेश से पहले, निवेशक को Private Placement Memorandum (PPM) नाम की डॉक्यूमेंट स्टडी करनी होती है, जिसमें फंड की रणनीति, जोखिम और रिटर्न की जानकारी दी जाती है।

निवेश कहां लगता है?

AIF का ज्यादातर निवेश नॉन लिस्टेड (Unlisted) सेक्टर्स में किया जाता है, जहां ग्रोथ की संभावनाएं अधिक होती हैं। उदाहरण के तौर पर, वेंचर कैपिटल फंड्स नए और उभरते हुए स्टार्टअप्स को फंडिंग देते हैं ताकि वे अपने बिजनेस को बढ़ा सकें। वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स सड़कों, पुलों, हवाईअड्डों और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे प्रोजेक्ट्स में निवेश करते हैं, जिससे देश के विकास को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, प्राइवेट इक्विटी फंड्स उन कंपनियों में पूंजी लगाते हैं जो अभी स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं हैं लेकिन उनके बिजनेस मॉडल में विस्तार की संभावनाएं होती हैं।

क्या हुए हैं बड़े बदलाव

वहीं, 2025 में SEBI और RBI ने AIF से जुड़े कई बड़े बदलाव किए हैं, ताकि इस सेक्टर में पारदर्शिता और निवेशकों का भरोसा बढ़ाया जा सके। अब फंड मैनेजरों के लिए NISM परीक्षा देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे उनकी प्रोफेशनल क्वालिटी सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, एंजेल फंड्स को अब AIF में बदलने या शामिल होने के लिए जुलाई 2025 तक की समय सीमा दी गई है। सितंबर 2025 में SEBI ने एक नया नियम पेश किया है Co-Investment, जिसके तहत निवेशक अब फंड के साथ किसी कंपनी में सीधे निवेश कर सकते हैं। साथ ही, RBI ने भी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए AIF में निवेश की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। ये सभी बदलाव मिलकर भारत में वैकल्पिक निवेश के क्षेत्र को और मज़बूत बना रहे हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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