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Tata Trust में घमासान के बीच नोएल टाटा को राहत! NRTT शेयर ट्रांसफर पर क्लीन चिट

टाटा ग्रुप में फिलहाल टाट सन्स और टाटा ट्रस्ट पर वर्चस्व को लेकर घमासान मचा है। लेकिन, इस बीच टाटा ग्रुप के चेयरमैन नोएल टाटा को NRTT शेयर ट्रांसफर मामले में बड़ी राहत मिली है।

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नोएल टाटा को मिली बड़ी राहत

Tata Trust Noel Tata NRTT Share Transfer : टाटा समूह में नेतृत्व को लेकर जारी घमासान के बीच चेयरमैन नोएल टाटा को बड़ी राहत मिली है। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट (NRTT) से जुड़े 1989 के 833 टाटा सन्स शेयरों के ट्रांसफर के मामले की जांच बंद कर दी है। 2 सितंबर, 2026 के अपने आदेश में स्टेट चैरिटी कमिश्नर अमोघ कोलीटी ने माना कि यह ट्रांजैक्शन उस समय लागू कानूनों के मुताबिक हुआ था और इसमें जरूरी प्रक्रिया का पालन किया गया था।

क्यों अहम था यह मामला?

1989 में NRTT ने टाटा सन्स के 833 शेयर Naval H. Tata, यानी नोएल टाटा के पिता, को ट्रांसफर किए थे। हाल के महीनों में Tata Trust के भीतर नियंत्रण को लेकर तनाव बढ़ने के बीच इस पुराने ट्रांजैक्शन पर फिर सवाल उठाए गए थे। आरोप था कि चैरिटेबल ट्रस्ट की की संपत्ति को प्राइवेट खाते में ट्रांसफर किया गया।

टैक्स की वजह से बेचने पड़े शेयर

चैरिटी कमिश्नर के मुताबिक, NRTT ने शेयर बेचने का फैसला अचानक नहीं लिया था। ट्रस्ट 1984 से ही इस संभावना पर विचार कर रहा था। इसकी बड़ी वजह Income Tax Act में बदलाव था, जिससे चैरिटेबल ट्रस्ट के पास मौजूद कुछ सिक्योरिटीज के टैक्स छूट स्टेटस पर असर पड़ सकता था।

इसी वजह से नवंबर 1988 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने NRTT को नेशनल ट्रस्ट के तौर पर मान्यता देने से भी इनकार कर दिया। इसके बाद ट्रस्ट पर टैक्स दायित्व का खतरा बढ़ गया। आदेश के मुताबिक, 1986-87 से 1988-89 के एसेसमेंट ईयर के लिए संभावित टैक्स करीब ₹4.23 लाख था। कमिश्नर ने माना कि इस स्थिति में शेयर बेचकर ट्रस्ट की संपत्ति को बचाना एक वास्तविक जरूरत थी।

नवल टाटा नहीं थे ट्रस्टी

कमिश्नर ने इस दलील को भी माना कि कि नवल टाटा ने 1 जनवरी, 1988 को ही NRTT के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में यह बदलाव चैरिटी कमिश्नर को भी रिपोर्ट किया गया। जाने-माने वकील नानी ए पालकीवाला से इस मामले में कानूनी सलाह भी ली गई। दिसंबर 1988 में उनकी राय के आधार पर ही नवल टाटा को ट्रस्टी पद से बाहर कर उनके शेयर खरीदने का विकल्प इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही शेयर को को टाटा परिवार के बाहर ट्रांसफर नहीं करने की शर्त भी रखी गई।

₹15.94 लाख में हुआ था सौदा

833 शेयर का वैल्यूएशन ₹1,914 प्रति शेयर तय हुआ। इसके बाद नवल टाटा ने 18 जनवरी, 1989 को ₹15.94 लाख में ट्रांजैक्शन पूरा किया। ट्रस्ट की बैलेंस शीट में इस बिक्री से ₹8.15 लाख का प्रॉफिट भी दिखाया गया।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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