बिहार के सियासी रण में जो नतीजे सामने आए हैं, वे कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चौंकाने वाले हैं। पिछली बार 50 सीटों से नीचे रहने वाली जेडीयू इस बार 84 से अधिक सीटों पर पकड़ बनाई है। यह अप्रत्याशित वापसी सिर्फ चुनावी रणनीति की नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के 20 साल के शासनकाल में बनी योजनाओं और सामाजिक सुधारों की देन है। ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार पहले ही समझ चुके थे कि उन्होंने जिस दिशा में कदम बढ़ाए हैं, वह अब नतीजों के रूप में लौटकर आएंगे। इस पूरे चुनाव में नीतीश कुमार एक “स्कीम पुरुष” के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जिनकी योजनाओं का प्रभाव खासकर महिला मतदाताओं पर गहरा दिखा है।
बिहार में इस चुनावी लहर के पीछे अगर किसी एक वर्ग की सबसे बड़ी भूमिका है, तो वह है महिलाओं की। नीतीश कुमार ने अपने शुरुआती कार्यकाल से ही महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए। 2006 में शुरू हुई साइकिल और यूनिफॉर्म योजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जब लड़कियां साइकिल चलाकर स्कूल जाने लगीं, तो यह सिर्फ एक योजना की सफलता नहीं थी, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक जीवंत तस्वीर थी। इससे लड़कियों की शिक्षा में उपस्थिति और उच्च शिक्षा तक पहुंच में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई। इसी वर्ष पंचायती राज अधिनियम में संशोधन कर पंचायतों और शहरी निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया गया, जिसने महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका में ला खड़ा किया।
इन सबके बाद, चुनाव से ठीक पहले की गई “10 हज़ारिया स्कीम” ने महिला मतदाताओं को निर्णायक रूप से जेडीयू के पक्ष में मोड़ दिया। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 1.30 करोड़ जीविका दीदियों के खाते में सीधे 10–10 हजार रुपये भेजे गए। करीब 1.4 करोड़ महिलाओं को सीधा लाभ पहुंचा, जो राज्य के कुल महिला मतदाताओं का लगभग 40 फीसदी हिस्सा हैं। साथ ही प्रदर्शन के आधार पर 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता का वादा भी किया गया। इस आर्थिक सशक्तिकरण ने महिला वोट बैंक को अभूतपूर्व रूप से एकजुट किया।
नीतीश कुमार की लोकप्रियता में शराबबंदी की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। 4 अप्रैल 2016 को लागू की गई पूर्ण शराबबंदी ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया। शराब से टूटते परिवारों के बीच यह कदम राहत की सांस बनकर आया और इसी कारण महिलाओं के बीच नीतीश की छवि एक सामाजिक सुधारक की बनी रही, जो आज भी कायम है।
महिलाओं के साथ-साथ युवाओं को साधने के लिए भी नीतीश कुमार ने कई बड़ी योजनाएं शुरू कीं। 2 अक्टूबर 2016 को शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना’ के तहत 20 से 25 साल के बेरोजगार युवाओं को दो साल तक 1,000 रुपये हर महीने देने की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड’ योजना ने उच्च शिक्षा के लिए 4 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त लोन उपलब्ध कराया, ताकि कोई भी छात्र आर्थिक कमी के कारण पढ़ाई न छोड़ दे। इन योजनाओं ने युवाओं को सीधे सरकार से जोड़ा और उनकी आकांक्षाओं को नई दिशा दी।
जनसामान्य और हर परिवार को राहत देने के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 400 रुपये से बढ़ाकर 1,100 रुपये कर दिया गया, जिससे एक करोड़ से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिला। वहीं अगस्त 2025 से घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा ने हर घर को राहत पहुंचाई। यह सभी योजनाएं ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम के विस्तार का हिस्सा रहीं, जिनमें हर घर नल का जल, पक्की सड़कें और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे बुनियादी सुधार शामिल हैं।