बिजनेस

कच्चे तेल की कीमतों पर निर्मला सीतारमण का बड़ा बयान, कहा- महंगाई पर नहीं पड़ेगा असर

अमेरिका और इजराइल के 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। हमले के जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों के साथ-साथ इजराइल पर भी हमले किए हैं।

Image

कच्चे तेल की कीमतों पर निर्मला सीतारमण का बड़ा बयान, कहा- महंगाई पर नहीं पड़ेगा असर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का महंगाई पर खास असर पड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि देश में मुद्रास्फीति पहले से ही अपने निचले स्तर के करीब है।

सीतारमण ने लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में कहा कि वैश्विक कच्चे तेल और भारतीय बास्केट (अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों का भारांश औसत, जिनकी खरीद भारतीय रिफाइनरी करती हैं) दोनों की कीमतों में पिछले एक वर्ष से लगातार गिरावट का रुख था। 28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से इसमें तेजी आई है।

80.16 अमेरिकी डॉलर तक पहुंची कीमत

पीटीआई/भाषा के मुताबिक वित्त मंत्री ने कहा, ’’फरवरी के अंत से दो मार्च, 2026 तक कच्चे तेल की कीमत (भारतीय बास्केट) 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 80.16 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। चूंकि भारत में मुद्रास्फीति अपने निचले स्तर के करीब है, इसलिए फिलहाल महंगाई पर इसका प्रभाव महत्वपूर्ण नहीं माना जा रहा है।’’ वह इस सवाल का जवाब दे रही थीं कि क्या सरकार ने देश में मुद्रास्फीति पर बढ़ते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के प्रभाव की समीक्षा की है।

अमेरिका और इजराइल के 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। हमले के जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों के साथ-साथ इजराइल पर भी हमले किए हैं।

इस सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की अक्टूबर, 2025 की मौद्रिक नीति रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि यदि कच्चे तेल की कीमत आधारभूत अनुमानों से 10 प्रतिशत अधिक होती हैं और घरेलू कीमतों पर इसका पूरा प्रभाव पड़ता है, तो मुद्रास्फीति 0.3 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

हालांकि, मुद्रास्फीति पर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का मध्यम अवधि का प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है। इसमें विनिमय दर में उतार-चढ़ाव, वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति, मौद्रिक नीति का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाना, सामान्य मुद्रास्फीति की स्थिति और अप्रत्यक्ष प्रभाव की सीमा शामिल हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित औसत खुदरा मुद्रास्फीति 2025-26 (अप्रैल-जनवरी) में घटकर 1.8 प्रतिशत पर रही। जबकि 2024-25 में यह 4.6 प्रतिशत और 2023-24 में 5.4 प्रतिशत थी।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

और पढ़ें
End of Article