नए श्रम कानून से महिलाओं की बल्ले-बल्ले, मिलेंगे 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश और बहुत कुछ
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Dec 13, 2025, 01:09 PM IST
New Labour Codes, Women Workforce Participation: ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ एम्प्लॉयर्स (AIOE) और लॉ फर्म शार्दुल अमरचंद मंगलदास द्वारा जारी एक श्वेत पत्र के अनुसार लागू हुए चार नए लेबर कोड महिलाओं के लिए रोजगार को अधिक सुरक्षित, स्थिर और सुलभ बनाकर वर्क फोर्स में उनकी भागीदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकते हैं।
महिला श्रम भागीदारी बढ़ाने की दिशा में नए श्रम कानून एक नई शुरुआत (तस्वीर-ANI)
New Labour Codes, Women Workforce Participation: देश में महिलाओं की वर्कफोर्स में भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित चार नई श्रम संहिताएं (लेबर कोड्स) 21 नवंबर 2025 से लागू हो गई हैं। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ एम्प्लॉयर्स (AIOE) और प्रमुख लॉ फर्म शार्दुल अमरचंद मंगलदास द्वारा जारी एक श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) में कहा गया है कि ये नए कानून महिलाओं के लिए काम को अधिक सुरक्षित, सुलभ और स्थायी बनाकर उनके रोजगार के अवसरों में महत्वपूर्ण वृद्धि कर सकते हैं।
महिलाओं की भागीदारी में बढ़ोतरी का संकेत
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक “ब्रेकिंग द ग्लास सीलिंग: हाउ द लेबर कोड्स बूस्ट विमेन्स पार्टिसिपेशन इन इंडियाज वर्कफोर्स” शीर्षक वाले इस श्वेत पत्र में बताया गया है कि भारत में महिला श्रम बल भागीदारी दर में लगातार सुधार हुआ है। वर्ष 2017-18 में यह दर 23.3 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में बढ़कर 41.7 प्रतिशत हो गई है। यह बदलाव सामाजिक सोच में परिवर्तन और महिला-केंद्रित कानूनों व सरकारी योजनाओं का परिणाम माना जा रहा है।
महिला-केंद्रित कानूनों और योजनाओं की भूमिका
श्वेत पत्र के अनुसार, मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 और वर्क प्लेस पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, 2013 जैसे कानूनों ने महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने में अहम भूमिका निभाई है। इसके साथ ही मिशन शक्ति, NAVYA और WISE-KIRAN जैसी सरकारी योजनाओं ने महिलाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं।
श्रम संहिताओं से कानून व्यवस्था में सरलता
नई श्रम संहिताओं का एक बड़ा उद्देश्य पुराने और जटिल श्रम कानूनों को एक सरल और एकीकृत ढांचे में लाना है। श्वेत पत्र के अनुसार, इससे न केवल नियोक्ताओं के लिए अनुपालन आसान होगा, बल्कि महिलाओं को भी अधिक सुरक्षित और स्थिर रोजगार मिलेगा। स्पष्ट नियमों से कामकाजी माहौल बेहतर होगा और महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी।
मातृत्व और सामाजिक सुरक्षा को मजबूती
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत मातृत्व लाभ पहले की तरह मजबूत बने रहेंगे। पात्र महिला कर्मचारियों को 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश मिलेगा, जबकि दत्तक और सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली महिलाओं को 12 सप्ताह का अवकाश दिया जाएगा। इसके अलावा नर्सिंग ब्रेक, चिकित्सा सहायता और गर्भावस्था से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिससे महिलाओं को काम छोड़ने की मजबूरी कम होगी।
ईएसआई और गिग वर्कर्स को लाभ
श्वेत पत्र में यह भी बताया गया है कि कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) योजना का विस्तार अब सभी उद्योगों और जिलों में किया गया है, जिसमें बागान जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती हैं। साथ ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। यह कदम उन महिलाओं के लिए खास तौर पर फायदेमंद है जो घरेलू जिम्मेदारियों के कारण लचीले काम पर निर्भर रहती हैं।
हर क्षेत्र में काम का अवसर
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां संहिता के तहत महिलाओं को सभी प्रतिष्ठानों में काम करने की अनुमति दी गई है। अब वे रात की शिफ्ट और पहले प्रतिबंधित माने जाने वाले क्षेत्रों में भी काम कर सकेंगी, बशर्ते उनकी सहमति हो और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हों। आईटी, स्वास्थ्य, विमानन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में इसे महिलाओं की तरक्की के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
कार्यान्वयन पर निर्भर होगी सफलता
हालांकि श्वेत पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि केवल कानून बना देने से बदलाव नहीं आएगा। इन सुधारों का असली असर तभी दिखेगा जब नियोक्ता इन्हें सही ढंग से लागू करें, बाजार सकारात्मक प्रतिक्रिया दे और संस्थाएं सक्रिय भूमिका निभाएं। अगर ऐसा हुआ, तो ये श्रम संहिताएं भारत में महिलाओं के लिए एक नई और मजबूत कार्य संस्कृति की नींव रख सकती हैं।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। बिज़नेस (Business News) अपडेट और आज का सोने का भाव (Gold Rate Today), आज की चांदी का रेट (Silver Rate Today) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।