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HR मेल के बाद बढ़ी टेंशन! क्या नए लेबर कोड से कम होगी In-hand salary? पूरा गणित समझें

In-hand Salary Calculation: क्या आपके ऑफिस में भी एचआर की ओर से आपके सैलरी स्ट्रक्चर को लेकर कोई मेल आया है? अगर हां तो यह जानकारी आपके लिए और भी जरूरी हो जाती है। 'इन-हैंड सैलरी' (In-hand Salary) पिछले कुछ दिनों से कर्मचारी और कॉर्पोरेट जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्या इन-हैंड सैलरी सच में कम होने जा रही है? यही सवाल हर किसी को परेशान कर रहा है।

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क्या सच में कम हो जाएगी इन हैंड सैलरी (Photo: iStock)

In-hand Salary Calculation: 1 अप्रैल यानी नए महीने की शुरुआत के साथ ही कई कंपनियों में एचआर के मेल ने कर्मचारियों की सैलरी से जुड़ी चिंता को बढ़ा दिया है। एचआर की ओर से आए मेल में साफ कहा जा रहा है कि कंपनी अपने सैलरी स्ट्रक्चर को मजबूत और बेहतर बनाने के निरंतर प्रयासों के तहत 1 अप्रैल 2026 से कर्मचारियों के लिए एक रिवाइज्ड सैलरी स्ट्रक्चर लागू करने जा रही है। इस रिवाइज्ड सैलरी स्ट्रक्चर का मतलब साफ है कि अब नियमों के अनुसार, कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी कम हो सकती है।

इस नए स्ट्रक्चर को इस तरह तैयार किया गया है कि वेतन के अलग-अलग हिस्सों जैसे फिक्स्ड पे, भत्ते, रिटायरमेंट लाभ (Retirals) और रिइम्बर्समेंट में अधिक स्पष्टता, एकरूपता और फ्लेक्सिबिलिटी आए। दरअसल, कंपनियां इस बदलाव को अपना रही हैं ताकि एक एम्प्लॉई-सेंट्रिक फ्रेमवर्क बनाया जा सके, जिसमें कर्मचारियों की वर्तमान फाइनेंशियल जरूरतों के अलावा, लॉन्ग-टर्म सिक्योरिटी का भी खास ख्याल रखा जाए।

क्यों घटने जा रही है इन-हैंड सैलरी

लेबर कोड

दरअसल, यह बड़ा बदलाव लेबर कोड्स और सैलरी स्ट्रक्चर से जुड़ा है। नए नियमों के अनुसार, बेसिक सैलरी का हिस्सा बढ़ सकता है, जिससे PF (Provident Fund) और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ेगा। इसका मतलब है कि आपकी इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन भविष्य के लिए आपकी बचत मजबूत होगी। नए लेबर कोड में ‘वेजेस’ सेक्शन के तहत कंपनियों को अब कर्मचारियों की सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक वेज के रूप में देना जरूरी है। इसी के साथ, नए लेबर कोड लागू होने से ग्रेच्युटी के नियमों के मुताबिक फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी के लिए 5 साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे एक साल की नौकरी पूरी करने के बाद ही ग्रेच्युटी पा सकेंगे।

Income Tax Act 2025

इसके अलावा, 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर नियम और Income Tax Act 2025 के कारण सैलरी स्ट्रक्चर और इन-हैंड सैलरी पर असर देखने को मिल सकता है। सरकार का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल बनाना और पारदर्शिता बढ़ाना है। हालांकि, इसका सीधा असर आपकी टेक-होम सैलरी (इन-हैंड) बदलने के रूप में देखा जाएगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी आपकी टैक्स दर पहले जैसी ही रहेगी। लेकिन सैलरी के अलग-अलग कंपोनेंट्स (जैसे HRA, भत्ते, और परक्स) में बदलाव के कारण आपके हाथ में आने वाली रकम प्रभावित हो सकती है।

नए नियमों के तहत HRA (हाउस रेंट अलाउंस) से जुड़े नियमों में संशोधन किया गया है। बड़े शहरों में रहने वालों को ज्यादा छूट मिल सकती है, जिससे टैक्स कम हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, कुछ भत्तों और सुविधाओं को नए तरीके से टैक्स के दायरे में लाया जा सकता है। इसके अलावा, मील कार्ड (Meal Card) और अन्य भत्तों पर टैक्स बेनिफिट भी मिल सकता है। इससे कर्मचारियों को टैक्स बचाने का नया मौका मिलेगा। हालांकि, इन लाभों का फायदा तभी मिलेगा जब आपकी कंपनी सैलरी स्ट्रक्चर में इन्हें शामिल करे।

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Shivani Kotnala
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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