New Income Tax Act Update: संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने इनकम टैक्स विभाग से अपने ई-फाइलिंग पोर्टल और पूरे आईटी सिस्टम का ‘दबाव परीक्षण’ (Stress Test) करने को कहा है। समिति का कहना है कि 1 अप्रैल से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होने जा रहा है, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उस समय कोई तकनीकी समस्या सामने न आए। अगर सिस्टम पर ज्यादा लोगों का दबाव पड़े तो भी पोर्टल बिना रुकावट काम करे। समिति का मानना है कि लाखों टैक्सपेयर्स एक साथ रिटर्न दाखिल करते हैं। ऐसे में अगर तकनीकी खामी आती है तो लोगों को परेशानी होती है और इनकम टैक्स विभाग के कामकाज पर भी असर पड़ता है। इसलिए नए कानून के लागू होने से पहले पूरे सिस्टम की अच्छी तरह जांच और परीक्षण जरूरी है।
190 फॉर्म में से अभी केवल 54 ही तैयार
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली इस समिति को इनकम टैक्स विभाग ने जानकारी दी कि नए इनकम टैक्स अधिनियम के तहत कुल 190 फॉर्म अधिसूचित किए जाने हैं। हालांकि इनमें से अभी केवल 54 फॉर्म ही 31 मार्च 2026 तक तैयार हो पाएंगे। इनकम टैक्स विभाग के अनुसार बाकी फॉर्म बाद में चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाएंगे। इस जानकारी के बाद समिति ने चिंता जताई और कहा कि फॉर्म और नियमों की अधिसूचना जितनी जल्दी हो सके जारी की जानी चाहिए। समिति का मानना है कि अगर फॉर्म और नियम समय पर जारी नहीं होंगे तो करदाताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट और टैक्स पेशेवरों को नए सिस्टम को समझने और अपनाने में मुश्किल होगी।
करदाताओं को तैयारी का समय देने पर जोर
समिति ने सरकार और इनकम टैक्स विभाग से कहा है कि इनकम टैक्स नियमों और संबंधित फॉर्म की अधिसूचना और प्रकाशन की प्रक्रिया को तेज किया जाए। इससे करदाताओं और टैक्स विशेषज्ञों को नए कानून के अनुसार तैयारी करने का पर्याप्त समय मिल सकेगा। समिति ने यह भी कहा कि नया कानून लागू होने से पहले उसके सभी नियम, फॉर्म और प्रक्रियाएं साफ-साफ जारी कर दी जानी चाहिए, ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति पैदा न हो।
सितंबर 2025 की तकनीकी समस्याओं का हवाला
समिति ने अपनी सिफारिश देते समय सितंबर 2025 की उस घटना का भी जिक्र किया, जब इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल में तकनीकी खामियां सामने आई थीं। उस समय कई करदाताओं को रिटर्न दाखिल करने में परेशानी हुई थी और पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा था। इसी अनुभव को देखते हुए समिति ने कहा है कि इस बार पूरे आईटी सिस्टम की सख्ती से जांच की जाए। इसके तहत यह देखा जाए कि अगर एक साथ बड़ी संख्या में लोग पोर्टल का इस्तेमाल करें तो भी सिस्टम सही तरीके से काम करता रहे।
छह दशक पुराने कानून की जगह लेगा नया अधिनियम
गौर हो कि नया और सरल इनकम टैक्स एक्ट 2025, मौजूदा इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेने जा रहा है। करीब छह दशक पुराने इस कानून को सरल बनाने और टैक्स व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से नया कानून लाया गया है। सरकार का दावा है कि नए इनकम टैक्स कानून से नियमों को समझना आसान होगा और करदाताओं को भी कई प्रक्रियाओं में राहत मिलेगी। हालांकि इसके सफल क्रियान्वयन के लिए जरूरी है कि आईटी सिस्टम, फॉर्म और नियम समय पर तैयार हों।
इसी वजह से संसदीय समिति ने इनकम टैक्स विभाग को सलाह दी है कि नए कानून के लागू होने से पहले सभी तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि करदाताओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और पूरा सिस्टम सुचारू रूप से काम करता रहे।
