Face Identification Checks For Crypto Transfer : मनी लॉन्ड्रर्स क्रिप्टोकरेंसी (Crptocurrency) को 'प्राइवेट वॉलेट' (Private Wallet) में आराम से ट्रांसफर कर लेते हैं। इसके लिए उनसे अब तक कोई सवाल-जवाब का सिस्टम नहीं है। मगर अब ये सिस्टम खत्म होने वाला है। दरअसल भारत के क्रिप्टो एक्सचेंज (Crypto Exchange) एक नये नियम पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत सेंडर (भेजने वाले) की तरफ से क्रिप्टो प्राप्त करने वाले प्राइवेट वॉलेट के पीछे मौजूद व्यक्तियों की पहचान का खुलासा करने के बाद ही ट्रांसफर की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए फेस आइडेंटिफिकेशन (Face Identification) को शुरू किया जा सकता है।
कब होता है पहचान का खुलासा
क्रिप्टो ट्रेडों (Crypto Trades) में खरीदारों और विक्रेताओं की पहचान तब सामने रहती है जब वे लोकल एक्सचेंजों के क्लाइंट होते हैं जो उनसे स्टैंडर्ड नो-योर-कस्टमर प्रोसेस (KYC Process) के तहत उनसे आइडेंटिफिकेशन डॉक्यूमेंट्स लेते हैं।
अभी नहीं हैं नियम-कानून
अभी तक प्राइवेट वॉलेट के ओनर की पहचान जानने के लिए न तो कोई प्रोसेस है और न ही ऐसा कोई नियम है जिसके तहत किसी व्यक्ति को भारत में किसी एक्सचेंज के वॉलेट में रखे क्रिप्टो को किसी अन्य व्यक्ति के प्राइवेट वॉलेट में ट्रांसफर करने से रोका जाए, जो विदेशी नागरिक भी हो सकता है।
ईटी की रिपोर्ट में एक बड़े प्लेटफॉर्म के वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि किस तरह की आईडी ली जाएगी, कैसे ली जाएगी, और आईडी की प्रामाणिकता को चेक करने के लिए एक्सचेंज क्या कर सकते हैं, इस पर चर्चा चल रही है।
ये रही है कमजोर कड़ी
प्राइवेट वॉलेट या अननोन वॉलेट में ट्रांसफर क्रिप्टो इकोसिस्टम की एक कमजोर कड़ी रही है। अब इसी कड़ी पर क्रिप्टो एक्सचेंज लगाम लगाने की तैयारी में हैं। प्राइवेट वॉलेट में ट्रांसफर को ट्रैक करने के लिए प्रस्तावित नियम इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डिस्क्लेमर : क्रिप्टोकरेंसी में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
