Oilseeds Prices: विदेशी बाजारों में मजबूती के रुख के बीच देश के तेल- तिलहन बाजार में सोमवार को अधिकांश तेल- तिलहनों के दाम मजबूत बंद हुए तथा सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन तथा बिनौला तेल कीमतों में सुधार दर्ज हुआ। मलेशिया एक्सचेंज में मजबूती के बावजूद बाजार में सामान्य घट-बढ़ के तहत कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेज तथा ऊंचे दाम पर कम कारोबार के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम पूर्वस्तर पर बंद हुए। शिकॉगो और मलेशिया एक्सचेंज में सुधार का रुख है।
सरसों की कीमत में आया सुधार
बाजार सूत्रों ने कहा कि मंडियों में सरसों की आवक कम रहने से सरसों तेल-तिलहन में सुधार आया जबकि विदेशों में सुधार एवं इस वर्ष सोयाबीन का उत्पादन घटने के कयासों के बीच सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम में मजबूत रहे। बिनौला के माल की नगण्यता के बीच बिनौला तेल के दाम में सुधार आया।
जानें क्या है तेल-तिहलन का नया भाव
| तेल- तिलहन | कीमत |
| सरसों तिलहन | 5,975-6,035 रुपये प्रति क्विंटल |
| मूंगफली | 6,100-6,375 रुपये प्रति क्विंटल |
| मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) | 14,600 रुपये प्रति क्विंटल |
| मूंगफली रिफाइंड तेल | 2,210-2,510 रुपये प्रति टिन |
| सरसों तेल दादरी | 11,450 रुपये प्रति क्विंटल |
| सरसों पक्की घानी | 1,860-1,960 रुपये प्रति टिन |
| सरसों कच्ची घानी | 1,860-1,985 रुपये प्रति टिन |
| तिल तेल मिल डिलिवरी | 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल |
| सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली | 10,400 रुपये प्रति क्विंटल |
| सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर | 10,250 रुपये प्रति क्विंटल |
| सोयाबीन तेल डीगम, कांडला | 8,825 रुपये प्रति क्विंटल |
| सीपीओ एक्स-कांडला | 8,675 रुपये प्रति क्विंटल |
| बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा) | 10,300 रुपये प्रति क्विंटल |
| पामोलिन आरबीडी, दिल्ली | 9,775 रुपये प्रति क्विंटल |
| पामोलिन एक्स- कांडला | 8,850 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल |
| सोयाबीन दाना | 4,680-4,700 रुपये प्रति क्विंटल |
| सोयाबीन लूज | 4,490-4,610 रुपये प्रति क्विंटल |
| मक्का खल (सरिस्का) | 4,075 रुपये प्रति क्विंटल |
घट सकता है खरीफ तिलहन का उत्पादन
सूत्रों ने कहा कि सरकार को कुछेक फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की गारंटी देने के बजाय सभी देशी तिलहन के खरीद की गारंटी देनी चाहिये तभी किसानों को भरोसा बढ़ेगा। अन्यथा खरीफ तिलहन उत्पादन घट सकता है। सरकार को कोई भी फैसला जल्द से जल्द करना चाहिये क्योंकि जुलाई में खरीफ तिलहन की बुवाई खत्म होने के बाद फैसला करना बेमतलब हो जायेगा। अब कुछेक प्रमुख तेल संगठनों ने भी देशी बाजार के हित में आयातित तेलों पर शुल्क बढ़ाने की मांग की है। इस ओर गंभीरता से विचार करना जरूरी होगा।
