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लोन के लिए घर गिरवी रखा है? जानें फायदे, जोखिम और कानूनी पहलू

किसी भी मॉर्गेज डीड पर साइन करने से पहले आपको घर के पेपर की वैलिडिटी पता कर लेनी चाहिए. इसके अलावा आपको आपको टाइटल डीड्स की भी जांच कर लेनी चाहिए और ये पक्का कर लेना चाहिए कि घर पर पहले से कोई कर्ज या डिस्प्यूट तो नहीं है. इसके लिए आपको एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (Encumbrance Certificate) लेना चाहिए जो ये बताता है कि प्रॉपर्टी पर कोई पुराना कर्ज तो नहीं है. अगर ऐसा है तो आप मुसीबत में पड़ सकते हैं.

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Loan Against Home

अक्सर लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लोन लेते हैं, फिर चाहें वो घर लेना हो, बच्चों की पढ़ाई के लिए लोन हर मुसीबत में काम आता है. यही नहीं कुछ लोन अपना खुद बिजनेस शुरू करने के लिए भी लेते हैं. लेकिन आपके मौजूदा हालातों, सैलरी और कई फैक्टर्स को देखकर जब लोन नहीं मिलता है तो लोग अपनी चीजें जैसे घर या सोना गिरवी रखकर लोन लेते हैं. लेकिन जब आप कुछ गिरवी रखते हैं तो बैंक आपको एक अग्रीमेंट साइन करने के लिए देता है जिसमे कुछ शर्तें लिखी होती हैं.

ऐसे में अगर आपने भी लोन के लिए घर गिरवी रखा है तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है. आज हम आपको लोन के लिए घर गिरवी रखने पर उसके फायदे, जोखिम और कानून बताने जा रहे हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर आप कोई चीज गिरवी रखकर लोन लेने जा रहे हैं तो आपको बिना किसी जानकारी के मॉर्गेज डीड पर साइन नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आप बिना जानकारी या बिना पढ़े किसी भी डॉक्यूमेंन्ट पर साइन करते हैं तो वो आपको और आपकी संपत्ति को खतरे में डाल सकता है. ऐसे में आपको सबसे पहले मॉर्गेज डीड को समझना चाहिए। मॉर्गेज डीड 2 तरह की होती हैं. पहला है उपयोगाधिकार मॉर्गेज, जिसमें मालिकाना हक आपके पास रहता है, लेकिन घर का इस्तेमाल और देखभाल का अधिकार कर्ज देने वाले के पास रहता है. इसको आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि कर्ज चुकाने तक घर से मिलने वाला रेंट कर्जदाता ले सकता है.

दूसरा है सिंपल मॉर्गेज, इसमें घर आपके पास रहता है, लेकिन घर के पेपर्स कर्जदाता के पास रहते हैं. पेपर पर साइन करने से पहले आपको ये जानना जरूरी है कि आप किस मॉर्गेज में जा रहे हैं.

ध्यान रखें ये बात

किसी भी मॉर्गेज डीड पर साइन करने से पहले आपको घर के पेपर की वैलिडिटी पता कर लेनी चाहिए. इसके अलावा आपको आपको टाइटल डीड्स की भी जांच कर लेनी चाहिए और ये पक्का कर लेना चाहिए कि घर पर पहले से कोई कर्ज या डिस्प्यूट तो नहीं है. इसके लिए आपको एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (Encumbrance Certificate) लेना चाहिए जो ये बताता है कि प्रॉपर्टी पर कोई पुराना कर्ज तो नहीं है. अगर ऐसा है तो आप मुसीबत में पड़ सकते हैं.

शर्ते साफ़ होनी चाहिए

मॉर्गेज डीड में कर्ज से जुड़ी सारी शर्तें साफ-साफ लिखी होनी चाहिए। इसमें कर्ज की पूरी रकम, ब्याज दर और भुगतान की शर्तें स्पष्ट हों। आपको यह जरूर पता होना चाहिए कि ब्याज दर फिक्स है या बदलने वाली (फ्लोटिंग)। अगर ब्याज दर बदलती है, तो आपकी ईएमआई पर क्या असर पड़ेगा, यह पहले से समझ लें। साथ ही यह भी जांचें कि अगर आप कर्ज समय से पहले चुकाना चाहें तो उस पर कोई अतिरिक्त शुल्क (प्रीपेमेंट चार्ज) तो नहीं लगेगा।

मॉर्गेज डीड में कर्ज की अवधि और भुगतान की अंतिम तारीख भी पहले से तय होनी चाहिए। साथ ही यह भी जान लें कि अगर आप समय पर कर्ज नहीं चुका पाते हैं, तो कर्जदाता के पास क्या अधिकार होंगे और क्या वह आपकी संपत्ति जब्त कर सकता है।

कर्ज चुकाने के बाद क्या करें?

जब आप पूरा कर्ज चुका दें, तो कर्जदाता से सभी कागजात वापस लेना जरूरी है। इसके साथ ही आपको "नो ड्यूज सर्टिफिकेट" लेना चाहिए, जिससे यह साबित हो कि आपने पूरा कर्ज चुका दिया है। इसके बाद अपने टाइटल डीड्स वापस लें और मॉर्गेज खत्म होने पर घर के रिकॉर्ड को अपडेट करवा लें।

मॉर्गेज डीड में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि किसी विवाद की स्थिति में उसका निपटारा कैसे होगा मध्यस्थता के जरिए या फिर कोर्ट के जरिए। इस प्रक्रिया में आपकी संपत्ति सुरक्षित रहनी चाहिए और कानूनी नोटिस या मुकदमे की स्थिति में आपके अधिकार स्पष्ट हों।

ध्यान देने वाली बात है कि मॉर्गेज डीड को गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर बनाना और सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर्ड कराना जरूरी है। अगर यह रजिस्टर्ड नहीं होगी तो कानूनी रूप से मान्य नहीं मानी जाएगी और भविष्य में विवाद खड़ा हो सकता है। इसलिए मॉर्गेज डीड पर साइन करने से पहले सभी दस्तावेज़ों को ध्यान से पढ़ें, हर शर्त को समझें और किसी भी कागज पर बिना पूरी जानकारी के हस्ताक्षर न करें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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