नीट यूजी पेपर लीक मामले की सुनवाई के लिए बनाई गई विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सोमवार को पहली ही सुनवाई टल गई। बता दें कि ये सुनवाई राउज एवेन्यू स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई। दरअसल, सुनवाई टलने की वजह यह रही कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से कोई वकील अदालत में पेश नहीं हुआ।
यह मामला स्पेशल जज अनु ग्रोवर बालीगा की अदालत में दो आरोपियों दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। अदालत ने सुबह 10 बजकर 45 मिनट तक सीबीआई की ओर से किसी के उपस्थित न होने पर नाराजगी जताई।
अदालत 3 अगस्त तक स्थगित
आरोपियों के वकील ने बताया कि उन्हें रोहिणी जिला अदालत में दूसरे मामले की पैरवी करनी है, इसलिए सुनवाई को आगे बढ़ाया जाए। इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई 3 अगस्त तय करते हुए प्रॉसिक्यूशन डायरेक्टर को निर्देश दिया कि अगली तारीख पर सरकारी वकील की नियुक्ति सुनिश्चित करें।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 जुलाई को अधिसूचना जारी कर जज अनु ग्रोवर बालीगा की अदालत को Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट घोषित किया था। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा के बाद लिया गया।
न्यायिक हिरासत में भेजे गए 13 आरोपी
इससे पहले 25 जुलाई को विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने मामले के सभी 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 6 अगस्त तक बढ़ा दी थी। साथ ही आरोपी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि जांच में वह संगठित पेपर लीक गिरोह के सक्रिय साजिशकर्ताओं में से एक प्रतीत होते हैं। 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक के आरोप सामने आए थे। 12 मई को एनटीए ने परीक्षा रद्द कर दी। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई।
