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Medical Equipments: चिकित्सा उपकरणों के लिए नई योजना जल्द, मेक इन इंडिया होंगे ये प्रोडक्ट, ईलाज भी होगा सस्ता

Medical Equipment: पिछले साल अप्रैल में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने और ऐसे उपकरणों के आयात को कम करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति को मंजूरी दी थी।

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मेडिकल सेक्टर के लिए पीएलआई योजना

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Medical Equipments:सरकार घरेलू चिकित्सा उपकरण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नई योजना लांच करने जा रही है। नई योजना अगले एक महीने में शुरू की जाएगी। योजना शुरू करने के लिए वित्त मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। इसका उद्देश्य घरेलू उद्योग को लंबे समय में आत्मनिर्भर बनाने के लिए लाई जा रही है। विभिन्न उच्च तकनीक वाले चिकित्सा उपकरण जैसे कि कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और डायलिसिस मशीन जैसे उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। पिछले साल अप्रैल में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने और ऐसे उपकरणों के आयात को कम करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति को मंजूरी दी थी। इससे अगले पांच वर्षों में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र बढ़कर 50 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

क्या है तैयारी

औषध विभाग के सचिव अरुणीश चावला ने बुधवार को कहा कि योजना चिकित्सा उपकरण उद्योग के साथ विस्तृत परामर्श के बाद तैयार की जा रही है।चावला ने एक कार्यक्रम में कहा कि यह योजना अगले एक महीने में शुरू की जाएगी। यह हितधारक विचार-विमर्श का हिस्सा थी। इसे उद्योग की जरूरतों के साथ हिसाब से बनाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि नई योजना शुरू करने के लिए हमें वित्त मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। इस योजना में भविष्य में चिकित्सा उपकरणों पर आयात निर्भरता में कमी लाने की परिकल्पना की गई है।चावला ने कहा, यह योजना घरेलू उद्योग को लंबे समय में आत्मनिर्भर बनाने के लिए लाई जा रही है।

20 स्कीम पहले से शुरू

उन्होंने कहा कि चिकित्सा उपकरणों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना अब तक अच्छी तरह काम कर रही है और 20 नई परियोजनाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं।विभिन्न उच्च तकनीक वाले चिकित्सा उपकरण जैसे कि कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और डायलिसिस मशीन आदि का विनिर्माण अब देश में किया जा रहा है।पिछले साल अप्रैल में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने और ऐसे उपकरणों के आयात को कम करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति को मंजूरी दी थी।इस नीति से अगले पांच वर्षों में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र बढ़कर 50 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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