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Forex Reserve: सात दिन में ₹76,000 करोड़ घटा विदेशी मुद्रा भंडार, महंगे आयात का दिखा असर

भारत के विदेशी मुद्रा मंडार पर महंगे क्रूड का असर दिखने लगा है। बीते सात दिन में भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 76 हजार करोड़ रुपये यानी करीब 8 अरब डॉलर की कमी आई है।

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विदेशी मुद्रा भंडार घटा

Forex Reserve 22 May 2026 : भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट आई है। रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से जारी साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक 8 से 15 मई के दौरान एक सप्ताह के भीतर विदेशी मुद्रा भंडार में 8 अरब डॉलर यानी करीब 76 हजार करोड़ रुपये की कमी आई है।

रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को विदेशी मुद्रा भंडार के 15 मई, 2026 को समाप्त सप्ताह के आंकड़े जारी किए। इन आंकड़ों के मुताबिक भारत का फॉरेक्स रिजर्व अब 688.89 अरब डॉलर पर आ गया है। जबकि, इससे पिछले सप्ताह यह 696.99 अरब डॉलर के स्तर पर था।

FCA पर आया भारी दबाव

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक सबसे बड़ा दबाव फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में देखने को मिला। फॉरेक्स रिजर्व का सबसे बड़ा हिस्सा FCA के तौर पर रखा जाता है। इसमें डॉलर के साथ ही यूरो, पाउंड, येन जैसी विदेशी मुद्राएं रखी जाती हैं और इनका मूल्य डॉलर में निकाला जाता है। डॉलर में मजबूती आने पर इन परिसंपत्तियां का मूल्य घट जाता है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक रिपोर्ट किए गए सप्ताह में FCA 6.48 अरब डॉलर घटकर 545.90 अरब डॉलर रह गया है।

गोल्ड रिजर्व भी घटा

रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि इस सप्ताह में फॉरेक्स रिजर्व के हिस्से के तौर पर रखे जाने वाले गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में भी कमी आई है। RBI के पास मौजूद Gold Reserve की कीमत 1.53 अरब डॉलर घटकर 119.31 अरब डॉलर रह गई है। हालांकि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत से अब तक गोल्ड रिजर्व में कुल 3.92 अरब डॉलर की बढ़ोतरी बनी हुई है।

IMF रिजर्व पोजिशन और SDR भी कमजोर

स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) 49 मिलियन डॉलर घटकर 18.82 अरब डॉलर पर आ गए। वहीं IMF में भारत की Reserve Position भी 25 मिलियन डॉलर घटकर 4.85 अरब डॉलर रह गई।

रुपए पर दबाव बढ़ा

RBI डेटा के अनुसार, 15 मई 2026 को डॉलर के मुकाबले रुपया 95.93 के स्तर पर रहा, जो पिछले सप्ताह के 94.44 से कमजोर है। यानी रुपये में लगातार गिरावट का ट्रेंड बना हुआ है।

RBI ने सिस्टम से भारी लिक्विडिटी खींची

Liquidity Operations के आंकड़े दिखाते हैं कि RBI लगातार बैंकिंग सिस्टम से नकदी खींच रहा है। 15 मई को नेट 2.57 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी सिस्टम से बाहर गई। इससे साफ है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के मोड में है। यह असल में रिजर्व बैंक के पास ब्याज दर बढ़ाए बिना महंगाई को नियंत्रित करने का एक टूल है।

बैंक क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी हुई

भले ही रिजर्व बैंक लिक्विडिटी घटा रहा है। लेकिन, इसके बाद भी Scheduled Commercial Banks का कुल बैंक क्रेडिट सालाना आधार पर 16% बढ़कर 2.12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया। वहीं, सकल जमा में 12.3% की वृद्धि दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में लोन डिमांड मजबूत बनी हुई है।

महंगाई और बॉन्ड यील्ड भी ऊपर

RBI के आंकड़ो के मुताबिक अप्रैल 2026 में Wholesale Price Index (WPI) आधारित महंगाई 8.3% रही। Fuel and Power कैटेगरी में 24.7% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं 10-Year Government Bond Yield 7.02% पर पहुंच गई।

इकोनॉमी के लिए क्या है संकेत?

फॉरेक्स रिजर्व में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत बना हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। FCA में गिरावट यह भी संकेत देती है कि RBI संभवतः रुपये को अत्यधिक कमजोरी से बचाने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। दूसरी तरफ गोल्ड रिजर्व में सालाना तेज उछाल बताता है कि केंद्रीय बैंक अभी भी सोने पर भरोसा बढ़ा रहा है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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