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ITR-3 में बड़े बदलाव: सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर और F&O ट्रेडर्स के लिए नया कोड

ITR-3 में इन नए कोड्स को जोड़कर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्स सिस्टम को आधुनिक और प्रोफेशन-फ्रेंडली बनाया है। इससे टैक्सपेयर्स को सही रिटर्न भरने में आसानी होगी और सरकार को टैक्स रेवेन्यू की सही तस्वीर भी मिलेगी।

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Income Tax ITR 3 (Pic Credit: iStock)

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Income Tax ITR 3: इनकम टैक्स विभाग ने आईटीआर-3 (ITR-3) फॉर्म में बड़ा बदलाव किया है। इस बार पांच नए प्रोफेशनल कोड जोड़े गए हैं, जो खासतौर पर डिजिटल और नए उभरते व्यवसायों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इस कदम से टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न भरना आसान होगा और विभाग को निगरानी में पारदर्शिता मिलेगी।

किन-किन प्रोफेशन को मिली नई पहचान?

आईटीआर-3 फॉर्म में जो पांच नए प्रोफेशनल कोड जोड़े गए हैं:

1. सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर

2. फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F\&O) ट्रेडर

3. स्पेक्युलेटिव ट्रेडर (जैसे सट्टा कारोबार से जुड़े लोग)

4. कमिशन एजेंट

5. लाइव इवेंट आयोजक

इन प्रोफेशन कोड्स के जरिए टैक्सपेयर्स अब अपने पेशे के अनुसार सही कोड चुन सकेंगे।

क्यों उठाया गया यह कदम?

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इनकम टैक्स विभाग ने यह बदलाव बढ़ते डिजिटल प्रोफेशन और कमाई के नए स्रोतों को ध्यान में रखकर किया है। आज के समय में सोशल मीडिया से जुड़े प्रोफेशनल्स, ऑनलाइन ट्रेडर्स और इवेंट ऑर्गनाइजर्स की संख्या और कमाई में भारी इजाफा हुआ है, जिसे अब टैक्स सिस्टम में दर्ज किया जा रहा है।

इनफ्लुएंसर्स की कमाई ने किया चौंकाया

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते दो सालों में कई ऐसे सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर सामने आए हैं जिनकी सालाना कमाई ₹20 लाख से ₹5 करोड़ तक पहुंच चुकी है। कुछ मामलों में तो इनकी नेटवर्थ ₹100 करोड़ से भी ज्यादा पाई गई है। ऐसे प्रोफेशनल्स के लिए अलग कोड की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

गलत कैटेगरी की हो रही थी समस्या

कई मामलों में देखा गया है कि इनफ्लुएंसर या ट्रेडर्स गलत जानकारी देकर या तो टैक्स रिटर्न नहीं भरते थे या फिर गलत कैटेगरी चुनकर टैक्स से बचते थे। इससे टैक्स डिपार्टमेंट को रियल टाइम ट्रैकिंग में दिक्कत होती थी।

अब ट्रैकिंग होगी आसान

अब नए प्रोफेशनल कोड्स की मदद से टैक्स विभाग प्रोफेशन की सटीक पहचान कर सकेगा, रिटर्न में दी गई इनकम का बेहतर विश्लेषण कर पाएगा और डिजिटल व उभरते क्षेत्रों से टैक्स कलेक्शन को बढ़ा सकेगा।

बढ़ेगी पारदर्शिता और टैक्स कलेक्शन

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव टैक्स कलेक्शन में ट्रांसपेरेंसी लाने में मदद करेगा। इससे प्रोफेशनल्स को भी सही कोड चुनने में सुविधा होगी और विभाग की डाटा एनालिटिक्स क्षमता भी मजबूत होगी।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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