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2026 में बढ़ सकती है महंगाई, SBI रिपोर्ट ने बताई वजहें

Inflation Outlook 2026: State Bank of India (SBI) की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 में महंगाई पर मौसम में बदलाव और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार अगर मौसम के पैटर्न में उतार-चढ़ाव और ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता बनी रहती है, तो आने वाले समय में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।

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एल नीनो और वैश्विक हालात से 2026 में बढ़ सकती है महंगाई: SBI रिपोर्ट (तस्वीर-istock)

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Inflation Outlook 2026: State Bank of India (SBI) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में महंगाई पर मौसम के बदलाव और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का बड़ा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मौसम के पैटर्न और ऊर्जा कीमतों पर चल रहे अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर जारी रहता है, तो आने वाले समय में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। विशेष रूप से वैश्विक मौसम प्रणाली में संभावित बदलाव और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता को इसके मुख्य कारणों के रूप में देखा जा रहा है।

2026 में एल नीनो बनने की संभावना

रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वैश्विक मौसम पूर्वानुमानों से संकेत मिल रहे हैं कि 2026 में एल नीनो बनने की स्थिति बन सकती है। वर्तमान में El Niño–Southern Oscillation (ENSO) न्यूट्रल यानी सामान्य स्थिति में है। लेकिन वैज्ञानिक आंकड़ों से यह संकेत मिल रहा है कि यह स्थिति धीरे-धीरे बदलकर 2026 में सकारात्मक चरण में जा सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि नीनो 3.4 समुद्री सतह तापमान सूचकांक में हाल के रुझान यह दिखाते हैं कि आने वाले समय में एल नीनो बनने की संभावना बढ़ रही है। अनुमान के अनुसार इसके बनने की संभावना करीब 40 से 60 प्रतिशत के बीच हो सकती है।

भारतीय मानसून पर पड़ सकता है असर

भारत के मानसून पर कई वैश्विक मौसम प्रणालियों का असर पड़ता है। इनमें प्रमुख रूप से Indian Ocean Dipole (IOD) और ENSO शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार अगर एल नीनो के साथ IOD नकारात्मक स्थिति में हो, तो भारत में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है। फिलहाल IOD नकारात्मक चरण में है। अगर इसी दौरान एल नीनो विकसित होता है, तो इसका असर भारत के मानसून पर पड़ सकता है। कमजोर मानसून की स्थिति कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, जिससे खाद्य आपूर्ति कम हो सकती है और अंततः महंगाई बढ़ सकती है।

कृषि और खाद्य आपूर्ति पर संभावित प्रभाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जैसे देश में कृषि काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। अगर बारिश सामान्य से कम होती है, तो फसलों की पैदावार घट सकती है। इससे बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता कम हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं। खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे तौर पर महंगाई को प्रभावित करती है। इसलिए मौसम में संभावित बदलावों को देखते हुए नीति-निर्माताओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन सकता है।

वैश्विक युद्ध और ऊर्जा बाजार की चुनौती

रिपोर्ट में केवल मौसम संबंधी जोखिमों की ही बात नहीं की गई है, बल्कि वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों को भी महंगाई के लिए एक बड़ा खतरा बताया गया है। विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध और तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के कारण समुद्री व्यापार करीब ठप होने की स्थिति में पहुंच गया है। इससे कई देशों के बीच वस्तुओं के परिवहन और आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में उत्पादन भी प्रभावित हुआ है।

ऑयल ऑन वाटर की स्थिति

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भंडारण क्षमता की कमी के कारण कई जगह तेल को समुद्र में जहाजों पर ही रखा जा रहा है। इस स्थिति को “ऑयल ऑन वाटर” कहा जाता है। इस तरह की स्थिति से वैश्विक कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बढ़ जाती है। साथ ही इससे सट्टेबाजी भी बढ़ती है और कई क्षेत्रों में वास्तविक मांग भी बढ़ती हुई दिखाई देती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।

ऊर्जा सुरक्षा और समन्वित कदमों की जरुरत

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए देशों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय की जरूरत पहले से अधिक बढ़ गई है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करना और ऊर्जा के उपयोग को अधिक तर्कसंगत बनाना जरूरी होगा। रिपोर्ट के अनुसार अगर समय रहते ऐसे कदम उठाए जाते हैं, तो महंगाई पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

युद्ध के व्यापक असर

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि युद्ध का लाभ अक्सर कुछ सीमित लोगों को मिलता है, जबकि इसका बोझ पूरी दुनिया को उठाना पड़ता है। खासकर कमजोर और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर इसका असर ज्यादा दिखाई देता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर स्थिरता बनाए रखना और आर्थिक सहयोग बढ़ाना जरूरी हो जाता है, ताकि आम लोगों पर बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव को कम किया जा सके।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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