1 सितंबर से देश में एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अगर आपके घर में रसोई गैस का इस्तेमाल होता है, तो इन नए दिशानिर्देशों के बारे में जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि इनका सीधा असर आपकी जेब और गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर पड़ने वाला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक परिस्थितियों, माल ढुलाई लागत और जीएसटी जैसे कई फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए सरकार और तेल कंपनियां एलपीजी के नियमों और दरों में संशोधन करती हैं।
बदल जाएंगे LPG के ये नियम
नियमों में सबसे बड़ा और तात्कालिक बदलाव एलपीजी ई-केवाईसी (LPG e-KYC) से जुड़ा हुआ है। तेल कंपनियों ने ग्राहकों के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा को बढ़ाकर 31 अगस्त तय किया था। मीडिया रिपोर्ट्स और तेल मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक, जिन उपभोक्ताओं ने तय समय सीमा तक ई-केवाईसी नहीं कराई है, उनका एलपीजी कनेक्शन अस्थायी रूप से निलंबित या बंद किया जा सकता है। इतना ही नहीं, ई-केवाईसी पूरी न होने की स्थिति में ग्राहक रियायती यानी घरेलू दरों पर गैस सिलेंडर पाने के पात्र नहीं रहेंगे और उन्हें घरेलू सिलेंडर भी कमर्शियल दरों पर खरीदना पड़ सकता है।
ई-केवाईसी के अलावा, 1 सितंबर से प्राकृतिक गैस यानी पीएनजी (PNG) के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए भी एक नई इंसेंटिव योजना लागू हो रही है। सरकार का उद्देश्य शहरी इलाकों में पाइप वाली सुरक्षित और सुविधाजनक खाना पकाने की गैस को तेजी से पहुंचाना है। इस योजना के तहत, अगर किसी ग्राहक को घर में नया पीएनजी कनेक्शन मिल जाता है, तो उसे अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने के लिए 30 दिनों का समय दिया जाएगा, चाहे वह इंडेन, एचपी या भारत गैस का कनेक्शन हो।
गैस बुकिंग के नियमों में भी कड़ाई देखने को मिल रही है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सप्लाई चेन को संतुलित रखने के लिए एलपीजी रिफिल की बुकिंग के बीच एक निश्चित समय अंतराल लागू किया गया है। इसके तहत शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ता 25 दिनों से पहले दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर सकेंगे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह रिफिल अंतराल 45 दिनों का तय किया गया है।
