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Jan Dhan Yojana: जन धन योजना के 11 साल पूरे, पीएम मोदी और वित्त मंत्री ने कही ये बात

PM Jan Dhan Yojana: 11 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि कोई भी गरीब परिवार बैंकिंग से बाहर नहीं रहेगा। इसी संकल्प के तहत 2014 में 'जन धन योजना' शुरू की गई, जिसने भारत के वित्तीय क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया। 11वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने कहा कि इस योजना ने लोगों को अपना भाग्य खुद लिखने की ताकत दी।

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जनधन योजना पर पीएम ने क्या कहा (तस्वीर-x)

PM Jan Dhan Yojana: 11 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा वादा किया था कि भारत का कोई भी गरीब परिवार बैंकिंग सिस्टम से बाहर नहीं रहेगा। इसी संकल्प को साकार करते हुए 28 अगस्त 2014 को 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' (PMJDY) की शुरुआत हुई, जिसने देश के वित्तीय क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया।

प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना की 11वीं वर्षगांठ पर कहा कि PMJDY ने वित्तीय समावेशन को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाकर लोगों का सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि जब अंतिम व्यक्ति वित्तीय रूप से जुड़ा होता है, तो पूरा देश एक साथ आगे बढ़ता है। प्रधानमंत्री जनधन योजना ने ठीक यही हासिल किया। इसने सम्मान बढ़ाया और लोगों को अपना भाग्य खुद लिखने की शक्ति दी।

'जन धन' योजना: दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक प्रधानमंत्री जन धन योजना' (PMJDY) ने गरीब और वंचित वर्ग के लोगों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ा। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 13 अगस्त 2025 तक देशभर में कुल 56.16 करोड़ जनधन खाते खुले हैं। इनमें से 55.7% (31.31 करोड़) खाताधारक महिलाएं हैं। 66.7% (37.48 करोड़) खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं।

खातों की संख्या और जमा राशि में जबरदस्त वृद्धि

योजना के तहत खुलने वाले खातों की संख्या तीन गुना बढ़ी है। कुल जमा राशि 2,67,756 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, जो लगभग 12 गुना वृद्धि दर्शाती है। प्रति खाता औसत जमा राशि भी अगस्त 2015 के मुकाबले 3.7 गुना बढ़कर 4,768 रुपए हो गई है। अब तक 38.68 करोड़ रुपे कार्ड भी जारी किए जा चुके हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण का संदेश

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने योजना के 11 साल पूरे होने पर कहा कि वित्तीय समावेशन आर्थिक वृद्धि और विकास का प्रमुख चालक है। बैंक खातों तक सार्वभौमिक पहुंच गरीबों और वंचित वर्ग को औपचारिक अर्थव्यवस्था में पूरी तरह भाग लेने और उसके अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम बनाती है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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