ITR Filing FY2025-26 : वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) दाखिल करने का समय चल रहा है। ऐसे में हर टैक्सपेयर के लिए यह जरूरी है कि वह अपना ITR पूरी सावधानी और सही जानकारी के साथ भरे। छोटी-सी गलती भी इनकम टैक्स विभाग की नजर में आ सकती है और आपको टैक्स नोटिस (Income Tax Notice) का सामना करना पड़ सकता है। कई बार लोग यह सोचते हैं कि गलती जानबूझकर नहीं हुई, इसलिए कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। आज के समय में इनकम टैक्स विभाग आधुनिक तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में आपकी ओर से दी गई जानकारी और विभाग के पास मौजूद रिकॉर्ड में थोड़ा-सा भी अंतर होने पर सिस्टम अपने आप जांच शुरू कर सकता है।
अब डेटा के आधार पर हो रही है जांच
टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, पहले की तुलना में अब टैक्स विभाग की जांच पूरी तरह डेटा आधारित हो गई है। विभाग के पास बैंकों, कंपनियों, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रार, नियोक्ता (Employer) और अन्य वित्तीय संस्थानों से लगातार जानकारी पहुंचती रहती है। यहां तक कि विदेशों से भी सूचना साझा करने की व्यवस्था के तहत कई जानकारियां विभाग को मिल जाती हैं। इसलिए अगर आपके ITR में दी गई जानकारी इन रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती, तो आपको नोटिस मिल सकता है।
ITR और AIS/Form 26AS में अंतर पड़ सकता है भारी
सबसे आम गलती ITR और Annual Information Statement (AIS) या Form 26AS के बीच अंतर होना है। AIS में आपकी आय और वित्तीय लेनदेन की लगभग पूरी जानकारी दर्ज होती है। यदि आपने अपनी आय कम दिखाई है या किसी आय का उल्लेख नहीं किया है, जबकि उसकी जानकारी AIS में मौजूद है, तो विभाग इसे तुरंत पकड़ सकता है। ऐसे मामलों में टैक्स विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है या नोटिस जारी कर सकता है।
कैपिटल गेन की सही जानकारी देना जरूरी
अगर आपने शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या किसी अन्य निवेश को बेचकर मुनाफा कमाया है, तो उसकी सही जानकारी ITR में देना जरूरी है। कई लोग कैपिटल गेन की गणना में गलती कर देते हैं या उसे पूरी तरह रिपोर्ट ही नहीं करते। अब शेयर बाजार और अन्य निवेश से जुड़े लगभग सभी लेनदेन की जानकारी टैक्स विभाग के पास पहुंच जाती है। ऐसे में कैपिटल गेन छिपाना या गलत जानकारी देना नोटिस की वजह बन सकता है।
ब्याज, डिविडेंड जैसी आय छिपाना पड़ सकता है महंगा
कई नौकरीपेशा लोग केवल Form 16 के आधार पर ITR भर देते हैं और बैंक खाते से मिलने वाला ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट का ब्याज, डिविडेंड या छोटे निवेश से हुई आय को शामिल करना भूल जाते हैं। यह एक बड़ी गलती साबित हो सकती है। यदि इन आय पर TDS कट चुका है, तब भी उन्हें ITR में दिखाना जरूरी होता है। केवल TDS कट जाने से आपकी रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।
विदेशी आय और संपत्ति की जानकारी भी दें
अगर किसी व्यक्ति की विदेश में आय है, विदेशी बैंक खाता है, कोई विदेशी संपत्ति है या उसने विदेशी टैक्स क्रेडिट का दावा किया है, तो उसकी पूरी जानकारी ITR में देना अनिवार्य है। ऐसी जानकारी छिपाने पर टैक्स विभाग कड़ी कार्रवाई कर सकता है और नोटिस भेज सकता है।
बड़ी खरीदारी और घोषित आय में मेल होना चाहिए
इनकम टैक्स विभाग Statement of Financial Transactions (SFT) के जरिए बड़े वित्तीय लेनदेन पर भी नजर रखता है। यदि आपने महंगी प्रॉपर्टी खरीदी है, बड़ी रकम निवेश की है या कोई बड़ा खर्च किया है, लेकिन आपकी घोषित आय उससे मेल नहीं खाती, तो विभाग आपसे इसका स्रोत पूछ सकता है। ऐसे मामलों में भी नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है।
गलत टैक्स छूट का दावा भी बन सकता है परेशानी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स विभाग अब गलत या बढ़ा-चढ़ाकर किए गए टैक्स छूट (Deduction) के दावों पर भी खास नजर रख रहा है। कई लोग धारा 80C, 80D और अन्य टैक्स छूट का गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। इसी तरह HRA, LTA जैसी छूट बिना पर्याप्त दस्तावेजों के क्लेम करना भी जोखिम भरा हो सकता है। यदि आपने किराया दिखाकर HRA छूट ली है, लेकिन मकान मालिक ने उस किराए की आय घोषित नहीं की है, तो भी जांच हो सकती है। इसी तरह टैक्स बचाने के लिए फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर डिडक्शन दिखाने पर विभाग कार्रवाई कर सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में बदला है जांच का तरीका
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इनकम टैक्स विभाग की जांच का तरीका पूरी तरह बदल गया है। अब नोटिस किसी व्यक्ति को रैंडम तरीके से नहीं भेजे जाते। विभाग डेटा एनालिटिक्स और रिस्क असेसमेंट सिस्टम के जरिए उन मामलों की पहचान करता है, जहां जानकारी में गड़बड़ी या टैक्स चोरी की आशंका होती है। यही वजह है कि अब वेतनभोगी कर्मचारियों को भी नोटिस मिल रहे हैं। कई मामलों में सिर्फ किसी बैंक खाते के ब्याज या डिविडेंड की जानकारी भूल जाने जैसी छोटी गलती भी जांच का कारण बन रही है।
ITR भरते समय रखें इन बातों का ध्यान
ITR दाखिल करने से पहले AIS, Form 26AS और Form 16 का मिलान जरूर करें। बैंक ब्याज, FD, डिविडेंड, कैपिटल गेन, किराये की आय और अन्य सभी स्रोतों से हुई कमाई को सही-सही दर्ज करें। अगर आपने कोई टैक्स छूट या छूट (Exemption) का दावा किया है, तो उसके जरूरी दस्तावेज अपने पास रखें। साथ ही, यदि आपकी विदेशी आय या विदेशी संपत्ति है तो उसकी जानकारी भी पूरी पारदर्शिता के साथ दें।
छोटी गलती भी बन सकती है बड़ी परेशानी
आज के डिजिटल दौर में इनकम टैक्स विभाग के पास पहले से कहीं ज्यादा जानकारी उपलब्ध है। ऐसे में ITR भरते समय की गई छोटी-सी लापरवाही भी टैक्स नोटिस, रिफंड में देरी और अतिरिक्त जांच का कारण बन सकती है। इसलिए जल्दबाजी में रिटर्न दाखिल करने के बजाय सभी दस्तावेजों का मिलान करें और पूरी तरह सही जानकारी के साथ ITR फाइल करें। इससे न केवल टैक्स नोटिस से बचा जा सकेगा, बल्कि आपका रिफंड भी बिना किसी रुकावट के समय पर मिल सकेगा।
