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बॉस आपको ऑफिस टाइम के बाद रोक रहे हैं? New Labour कानून में ओवरटाइम को लेकर हुए हैं ये बड़े बदलाव

भारतीय वर्कप्लेस में एक अनोखी बात यह है कि बॉस एम्प्लॉई से ऑफिस के नॉर्मल घंटों के बाद भी काम करके पेंडिंग काम पूरा करने के लिए कहता है। कुछ लकी एम्प्लॉई को ऐसी सिचुएशन का सामना न करना पड़े।

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नया लेबर कानून

New Labour Code: केंद्र सरकार ने देशभर के कर्मचारियों और मजदूरों को बेहतर जिंदगी मुहैया कराने के लिए नए लेबर कानून लेकर आई है। इसमें छुट्टियों से लेकर ओवरटाइम के नियम में कई बदलाव किए गए हैं, जो कर्मचारियों के हक में हैं। ऐसे में अगर आपका बॉस आपसे रेगुलर ओवरटाइम कराता है तो आपको अपना हक जरूर जानना चाहिए। एक्सपर्ट का कहना है कि भारत में किसी भी कर्मचारी को ओवरटाइम के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यह पूरी तरह स्वैच्छिक होना चाहिए।

नया लेबर कोड और राज्य के लेबर कानून के अनुसार, भारत में प्राइवेट कंपनियों के लिए काम के घंटे और ओवरटाइम को कंट्रोल के लिए फैक्ट्रीज एक्ट, 1948: सेक्शन 51, 54, 55, 56, और 59 लागू है। यह रोज़ाना काम 9 घंटे और हफ़्ते का काम 48 घंटे तय करता है। यह कहता है कि हफ्ते में 48 घंटे या रोजाना 9 घंटे से ज्यादा काम करने पर आम मजदूरी से दोगुना पेमेंट किया जाना चाहिए।

क्या कहता है भारत का कानून?

भारत में निजी कंपनियों के लिए काम के घंटों को मुख्य रूप से तीन कानून नियंत्रित करते हैं:

फैक्ट्रीज एक्ट, 1948: यह कानून प्रतिदिन 9 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे की सीमा तय करता है। इससे अधिक काम करने पर कर्मचारी को उसकी सामान्य मजदूरी से दोगुना (Double) भुगतान मिलना अनिवार्य है।

राज्य शॉप्स एंड एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट: आईटी कंपनियों और ऑफिसों पर लागू होने वाला यह कानून हर राज्य का अलग होता है (जैसे दिल्ली या महाराष्ट्र एक्ट), लेकिन सभी में काम के घंटे और ओवरटाइम वेतन का स्पष्ट प्रावधान है।

नए लेबर कोड (OSH Code, 2020): यह नया कानून पुराने 13 कानूनों को समाहित करता है। इसके तहत सभी क्षेत्रों के वर्कर ओवरटाइम के हकदार हैं और भुगतान तय समय सीमा के भीतर होना चाहिए।

मौखिक निर्देशों का कानूनी जोखिम

अक्सर कंपनियां लिखित रिकॉर्ड के बजाय बोलकर ओवरटाइम कराती हैं। सबूत के अभाव में एम्प्लॉयर यह साबित नहीं कर सकता कि ओवरटाइम वैध था, और एम्प्लॉई के लिए यह साबित करना मुश्किल हो जाता है कि उसे मजबूर किया गया था।

किसे नहीं मिलता ओवरटाइम का लाभ?

कानून में एक बड़ा 'लूपहोल' है जिसका फायदा कंपनियां उठाती हैं। फैक्ट्रीज एक्ट और स्टैंडिंग ऑर्डर्स के तहत, जो लोग मैनेजरियल, एडमिनिस्ट्रेटिव या सुपरवाइजरी रोल में हैं और एक निश्चित सीमा से अधिक कमाते हैं, वे आमतौर पर ओवरटाइम वेतन के हकदार नहीं होते। कंपनियां अक्सर एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट में "बिजनेस की जरूरतों के हिसाब से काम" का क्लॉज़ जोड़कर इसे कवर करती हैं।

कर्मचारी क्या कदम उठा सकते हैं?

यदि आप पर अतिरिक्त काम का दबाव है, तो ये प्रैक्टिकल उपाय अपनाएं:

डिजिटल ट्रेल बनाएं: मौखिक निर्देशों के बाद एक फॉलो-अप ईमेल भेजें जिसमें चर्चा का सारांश हो। WhatsApp मैसेज और कैलेंडर इनवाइट्स को सेव रखें।

आंतरिक शिकायत: 20 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में 'इंटरनल ग्रिवांस कमेटी' के पास शिकायत करें।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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