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2026 में आने वाला है दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ, क्या भारतीय भी लगा सकेंगे पैसा?

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को लेकर निवेशकों के बीच बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2026 में स्पेसएक्स दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ ला सकती है, जिसकी वैल्यूएशन सैकड़ों अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस मेगा आईपीओ में भारतीय निवेशक भी सीधे निवेश कर पाएंगे और इसके लिए उन्हें क्या प्रक्रिया अपनानी होगी।

IPO

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दुनिया की सबसे चर्चित टेक और स्पेस कंपनियों में शामिल एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) साल 2026 में अपना आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है। अगर ऐसा होता है, तो यह अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है। ब्लूमबर्ग और न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने हाल ही में इनसाइडर शेयर सेल और बायबैक को मंजूरी दी है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि स्पेसएक्स खुद को पब्लिक लिस्टिंग के लिए तैयार कर रही है। इस खबर के बाद दुनियाभर के निवेशकों के साथ-साथ भारतीय निवेशकों की भी दिलचस्पी तेजी से बढ़ गई है।

इतनी हो जाएगी स्पेस X की वैल्यूएशन

रिपोर्ट के अनुसार, स्पेसएक्स ने हाल की सेकेंडरी ऑफरिंग में अपने कर्मचारियों और शुरुआती निवेशकों को 421 डॉलर प्रति शेयर के भाव पर शेयर बेचने का मौका दिया है। इसी प्रक्रिया के बाद कंपनी की वैल्यूएशन बढ़कर करीब 800 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। माना जा रहा है कि अगर आईपीओ लॉन्च होता है, तो स्पेसएक्स की वैल्यूएशन 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को भी पार कर सकती है, जो इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों की कतार में खड़ा कर देगा।

कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) ब्रेट जॉनसन ने शेयरहोल्डर्स को भेजे एक मेमो में बताया कि स्पेसएक्स 2.56 बिलियन डॉलर तक के शेयर 421 डॉलर प्रति शेयर के हिसाब से वापस खरीदने की योजना बना रही है। उन्होंने यह भी साफ किया कि आईपीओ को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और इसकी टाइमिंग, वैल्यूएशन और लॉन्च पूरी तरह से बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगी। हालांकि, उन्होंने यह संकेत जरूर दिया कि अगर सब कुछ सही रहा, तो पब्लिक ऑफरिंग के जरिए कंपनी बड़ी मात्रा में पूंजी जुटा सकती है।

सेकेंडरी ऑफरिंग क्या होती है?

आमतौर पर कंपनियां आईपीओ से पहले कर्मचारियों और शुरुआती निवेशकों को अपने शेयर बेचने का मौका देती हैं, ताकि उन्हें लिक्विडिटी मिल सके। स्पेसएक्स भी साल में एक-दो बार शेयर बायबैक करती है। इससे कंपनी को भी पूंजी मिलती है और शेयरहोल्डर्स को अपने निवेश से कैश निकालने का अवसर मिलता है। यही प्रक्रिया कंपनी को आईपीओ के लिए तैयार करने में मदद करती है।

स्पेसएक्स आईपीओ से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल अपने बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में कर सकती है। इनमें Starship और Starlink जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। Starship को भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों और मंगल ग्रह तक इंसानों को ले जाने के लिए तैयार किया जा रहा है, जबकि Starlink के जरिए दुनियाभर में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस दी जा रही है। इन प्रोजेक्ट्स के लिए भारी निवेश की जरूरत है, जिसे आईपीओ से पूरा किया जा सकता है।

क्या भारतीय निवेशक भी लगा सकेंगे पैसा?

भारतीय निवासी RBI की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेशी शेयरों और आईपीओ में निवेश कर सकते हैं। इस स्कीम के तहत हर भारतीय नागरिक एक वित्तीय वर्ष में 2.5 लाख डॉलर (करीब 2 करोड़ रुपये से ज्यादा) तक विदेश में निवेश के लिए भेज सकता है।

इसके लिए निवेशकों को सबसे पहले ऐसा ब्रोकर चुनना होगा, जो अमेरिकी शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश की सुविधा देता हो। भारत में कई प्लेटफॉर्म ग्लोबल ट्रेडिंग अकाउंट की सुविधा देते हैं, जबकि कुछ निवेशक सीधे यूएस-बेस्ड ब्रोकर के साथ भी अकाउंट खोलते हैं। इसके बाद PAN, पासपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेजों के जरिए KYC प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

KYC के बाद LRS रूट के जरिए बैंक से डॉलर में फंड ट्रांसफर किया जाता है और फिर ब्रोकर के प्लेटफॉर्म पर जाकर आईपीओ के लिए आवेदन किया जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि आईपीओ में शेयर मिलना तय नहीं होता। अगर अलॉटमेंट नहीं मिलता है, तो निवेशक लिस्टिंग के बाद भी एक्सचेंज से शेयर खरीद सकते हैं।

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रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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