IRFC Dividend 2026: पिछले पांच साल में करीब 300% का रिटर्न दे चुकी रेलवे फाइनेंस से जुड़ी कंपनी IRFC के शेयरों में हलचल है। शेयर फिलहाल करीब 1 फीसदी तेजी के साथ ट्रेड कर रहा है। शेयरों में तेजी के पीछे दो बड़ी वजह हैं। पहली, वजह है डिविडेंड का ऐलान और दूसरी वजह है कि कंपनी ने 70 हजार करोड़ रुपये का स्ट्रेटिजिक फंट जुटाने की योजना बनाई है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है कि FY26 के लिए ₹1.05 प्रति शेयर का दूसरा अंतरिम डिविडेंड घोषित किया गया है। इसके साथ ही बोर्ड ने FY27 के लिए ₹70,000 करोड़ तक फंड जुटाने की योजना को मंजूरी दी है, जिससे शेयर में हलचल देखने को मिल सकती है।
₹1.05 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान
Indian Railway Finance Corporation (IRFC) के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹1.05 प्रति इक्विटी शेयर का दूसरा अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है। कंपनी के शेयर का फेस वैल्यू ₹10 है। डिविडेंड के लिए 13 मार्च 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई है। यानी जिन निवेशकों के पास इस तारीख तक कंपनी के शेयर होंगे, वही इस डिविडेंड के पात्र होंगे। कंपनी ने बताया है कि डिविडेंड का भुगतान घोषणा की तारीख से 30 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा। नए नियमों के तहत डिविडेंड केवल इलेक्ट्रॉनिक मोड से ही निवेशकों के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा।
₹70,000 करोड़ जुटाने की तैयारी
बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹70,000 करोड़ तक के मार्केट बॉरोइंग प्रोग्राम को भी मंजूरी दी है। कंपनी यह फंड अलग-अलग माध्यमों से जुटा सकती है, जिनमें घरेलू और विदेशी बाजार दोनों शामिल हैं। फंड जुटाने के संभावित विकल्पों में ECB, ग्रीन बॉन्ड, ESG बॉन्ड, मसाला बॉन्ड, ऑफशोर लोन और अन्य डेट इंस्ट्रूमेंट शामिल हैं। यह रकम रेलवे की जरूरतों, पुराने कर्ज के रीफाइनेंसिंग और नए प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए इस्तेमाल होगी।
IRFC 2.0 के तहत बिजनेस का विस्तार
IRFC अब केवल रेलवे के रोलिंग स्टॉक फाइनेंसिंग तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी IRFC 2.0 रणनीति के तहत पावर, पोर्ट्स और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर में भी फाइनेंसिंग बढ़ा रही है। दिसंबर 2025 में कंपनी ने महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी (MAHAGENCO) को ₹5,000 करोड़ का टर्म लोन भी मंजूर किया था। इससे कंपनी के बिजनेस मॉडल में विविधता आने की उम्मीद है।
पिछले 6 महीनों में भी जुटाए बड़े फंड
पिछले छह महीनों में IRFC करीब $700 मिलियन के एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) जुटा चुकी है। इसके अलावा नवंबर 2025 में कंपनी ने ₹2,981 करोड़ के जीरो कूपन बॉन्ड भी जारी किए थे। यह दिखाता है कि कंपनी अब अलग-अलग स्रोतों से कम लागत पर पूंजी जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है।
शेयर पर क्या असर पड़ सकता है
डिविडेंड का ऐलान आमतौर पर निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है, क्योंकि इससे कंपनी की मजबूत कैश फ्लो स्थिति का संकेत मिलता है। वहीं, ₹70,000 करोड़ के बड़े फंड जुटाने की योजना यह बताती है कि कंपनी भविष्य के प्रोजेक्ट्स और विस्तार के लिए तैयार हो रही है। यदि यह फंड कम लागत पर जुटता है और नए सेक्टर में सफल निवेश होता है, तो लंबी अवधि में शेयर के लिए यह सकारात्मक ट्रिगर बन सकता है।
डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
