ब्रिटेन होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक बड़ा अभियान शुरू कर रहा है। इसके तहत रॉयल फ्लीट ऑक्सिलरी के 580 फीट लंबे जहाज या Sea Drones, आरएफए लाइम बे को अत्याधुनिक रोबोटिक माइन-हंटिंग सिस्टम से लैस कर तैनात किया जाएगा। यह जहाज अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों के साथ मिलकर समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने का काम करेगा।
इस ऑपरेशन में एआई (AI) से लैस ड्रोन्स का इस्तेमाल होगा, जो बिना किसी मानवीय जोखिम के समुद्र की सतह और तल को स्कैन करेंगे। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता साफ करना है। हालांकि, विशेषज्ञों के बीच अब भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह रोबोटिक सिस्टम इस क्षेत्र से बारूदी सुरंगों के खतरे को पूरी तरह खत्म कर पाएगा।
क्या हैं Sea Drones?
रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में 'सी ड्रोन्स' (Sea Drones) एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आए हैं। सरल शब्दों में कहें तो सी ड्रोन्स छोटे, बिना चालक वाले ऐसे जहाज या बोट्स होते हैं, जो पानी की सतह पर या उसके भीतर काम करते हैं। जिस तरह हवा में उड़ने वाले ड्रोन्स आसमान से निगरानी करते हैं, ठीक उसी तरह ये सी ड्रोन्स समुद्र के ऊपर या गहराई में अपने मिशन को अंजाम देते हैं। तकनीकी भाषा में इन्हें 'ड्रोन बोट्स', 'ड्रोन जहाज' या 'अनमैन्ड सरफेस व्हीकल्स' (USVs) भी कहा जाता है। ये ड्रोन्स अलग-अलग आकार और क्षमताओं में आते हैं और इनका इस्तेमाल केवल युद्ध के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण की निगरानी और वैज्ञानिक खोजों के लिए भी किया जाता है। हाल के वर्षों में, विशेषकर रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान, इन ड्रोन्स की कई तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि आधुनिक युद्ध में अब बड़े जहाजों के साथ-साथ इन छोटे और स्मार्ट ड्रोन्स की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो गई है।
कैसे करते हैं काम?
इन ड्रोन्स की कार्यप्रणाली बेहद दिलचस्प और आधुनिक है। सी ड्रोन्स में आमतौर पर हाई-डेफिनिशन कैमरे और बिल्ट-इन विस्फोटक लगे होते हैं। जब इन्हें लॉन्च किया जाता है, तो लंबी दूरी के लक्ष्य (Targets) इनमें पहले से ही प्रोग्राम कर दिए जाते हैं, जिससे ये स्वायत्त रूप से आगे बढ़ते हैं। जैसे ही ये ड्रोन अपने लक्ष्य के करीब पहुंचते हैं, दूर बैठा एक ऑपरेटर इन्हें रिमोट के जरिए कंट्रोल करने लगता है। ये कैमरे ऑपरेटर को रीयल-टाइम तस्वीरें भेजते हैं, जिससे सटीक हमला करना आसान हो जाता है। सैन्य उद्देश्यों की बात करें तो इनका उपयोग समुद्र के भीतर बिछाई गई बारूदी सुरंगों (Mines) को हटाने, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने या सीधे दुश्मन के जहाजों से टकराकर खुद को उड़ा देने के लिए किया जाता है। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अंधेरे या गंदे पानी में भी ये हजारों फीट नीचे छिपे खतरों का पता लगाने में सक्षम हैं।

Sea Drones
कितनी है कीमत?
अगर हम लागत (Cost) की बात करें, तो सी ड्रोन्स पारंपरिक हथियारों और मिसाइलों की तुलना में काफी सस्ते पड़ते हैं। एक सामान्य सी ड्रोन को लगभग $50,000 (करीब 42 लाख रुपये) में सोनार जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के साथ कस्टमाइज किया जा सकता है। वहीं, यूक्रेन द्वारा युद्ध में इस्तेमाल किए जा रहे उन्नत सी ड्रोन्स की कीमत लगभग $250,000 (करीब 2.1 करोड़ रुपये) तक होती है। सुनने में यह रकम बड़ी लग सकती है, लेकिन अगर इसकी तुलना लाखों-करोड़ों डॉलर की क्रूज मिसाइलों या अरबों रुपये के युद्धपोतों से की जाए, तो यह बेहद कम है। यही कारण है कि दुनिया भर की सेनाएं अब कम लागत और उच्च प्रभाव वाले इन सी ड्रोन्स पर अधिक भरोसा कर रही हैं। ये न केवल बजट के अनुकूल हैं, बल्कि बिना किसी मानवीय क्षति के मुश्किल से मुश्किल मिशन को पूरा करने की ताकत भी रखते हैं।
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