Uranium दुनिया के सबसे खतरनाक एलिमेंट्स में शामिल है। परमाणु ऊर्जा के रूप में यह मानवता के भविष्य को संवारने की क्षमता रखता है।वहीं, परमाणु बम बन के तौर पर धरती से इंसानियत को हमेशा मिटाने की आंशकाओं को जन्म देता है। यही वजह है कि यूरेनियम सामान्य रूप से ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध नहीं है। विकास और विनाश की बेसुमार क्षमता रखने वाली यह चीज महज 180 डॉलर यानी करीब 16-17 हजार रुपये प्रति किलो के भाव से उपलब्ध है।
हालांकि, एनरिचमेंट के हिसाब से इसकी कीमत बढ़ती जाती है। वेपन ग्रेड यूरेनियम साधारण यूरेनियम की तुलना में कई गुना ज्यादा महंगा होता है। वेपन ग्रेड एनरिच्ड यानी 90% से ज्यादा Enriched Uranium बेसकीमती होता है, क्योंकि यह ट्रेंडिंग के लिए उपलब्ध नहीं होता। लेकिन, इससे बनाने की कीमत अरबों डॉलर प्रति किलो तक जा सकती है। यह अलग-अलग देश में उनके पास मौजूद तकनीक और फीडस्टॉक की कीमत पर निर्भर करता है।
ईरान के पास मौजूद यूरेनियम की कीतनी कीमत?
ईरान के पास मौजूद 440 किलो 60% एनरिच्ड यूरेनियम की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि आप इसे किस नजरिये से देखा जा रहा है। सामान्य सिविल न्यूक्लियर बाजार में यदि प्रति किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम की लागत करीब $1.5 लाख (लगभग ₹1.2 करोड़) मानी जाए, तो 440 किलो की कुल कीमत करीब $66 मिलियन यानी लगभग ₹550–600 करोड़ बैठती है। लेकिन, यदि यही स्टॉक आगे प्रोसेस होकर वेपन-ग्रेड (90%+) में बदला जाए, तो इसकी संभावित रणनीतिक या ब्लैक मार्केट वैल्यू कई गुना बढ़कर $4 से $5 बिलियन यानी करीब ₹33,000–₹40,000 करोड़ तक पहुंच सकती है, क्योंकि इस स्तर का यूरेनियम सीधे परमाणु हथियार क्षमता से जुड़ा होता है और इसकी कोई आधिकारिक बाजार कीमत नहीं होती, बल्कि यह पूरी तरह सामरिक महत्व से तय होती है।
फ्यूल ग्रेड vs वेपन ग्रेड: असली फर्क कहां है?
यूरेनियम का असली खेल उसकी शुद्धता यानी U-235 आइसोटोप के प्रतिशत में छिपा होता है। प्राकृतिक यूरेनियम में यह सिर्फ 0.7% होता है, जिसे बढ़ाकर अलग-अलग उपयोग के लिए तैयार किया जाता है। फ्यूल ग्रेड यूरेनियम में U-235 का स्तर 3% से 5% तक होता है, जिसका इस्तेमाल बिजली बनाने वाले परमाणु रिएक्टरों में होता है। इसमें प्रतिक्रिया नियंत्रित रहती है और ऊर्जा धीरे-धीरे निकलती है। वहीं, वेपन ग्रेड यूरेनियम में यह स्तर 90% से ज्यादा होता है। यह अत्यधिक अस्थिर होता है और माइक्रोसेकंड में भारी विस्फोट कर सकता है। यही कारण है कि 20% से ऊपर का यूरेनियम भी “हथियार-उपयोगी” माना जाता है।
60% से 90%: सबसे खतरनाक शॉर्टकट
वर्ल्ड न्युक्लियर एसोसिएशन के मुताबिक यूरेनियम का असली खतरा 60% एनरिचमेंट के बाद शुरू होता है। तकनीकी रूप से इस स्तर तक पहुंचना कुल प्रक्रिया का लगभग 99% काम पूरा कर देता है। इसके बाद 90% यानी वेपन ग्रेड तक पहुंचना बेहद आसान और तेज हो जाता है। यही वजह है कि ईरान का 60% एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को बड़ा खतरा लग रहा है।
ईरान को लगी ट्रिलियन डॉलर की चोट
4oo किलो यूरेनियम की कीमत चाहे कुछ करोड़ या सैकड़ों करोड़ रुपये क्यों न हो, लेकिन ईरान के लिए इसकी असली कीमत कहीं ज्यादा भारी साबित हुई है। प्रतिबंध, युद्ध और आर्थिक अलगाव के चलते देश को 300 बिलियन से लेकर 1 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान झेलना पड़ा है। उद्योग तबाह हुए, निर्यात रुका और आम जनता की आय में भारी गिरावट आई।
