बिजनेस

अब होर्मुज में नहीं चलेगा डॉलर, ईरान के इलाके से गुजरने वाले जहाजों को अब देनी होगी 'युआन' में फीस

अमेरिकी डॉलर की वैश्विक बादशाहत को चुनौती देते हुए ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नया नियम लागू किया है। अब इस मार्ग से गुजरने वाले तेल जहाजों को टोल टैक्स के रूप में 'चीनी युआन' में भुगतान करना होगा। इस फैसले से अमेरिका में खलबली मच गई है।

Image

Iran Hormuz Fees In Yuan

दुनिया के वैश्विक बाजार में इन दिनों एक ऐसी हलचल मची है, जिसने महाशक्ति अमेरिका की रातों की नींद उड़ा दी है। दशकों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, खासकर कच्चे तेल का कारोबार अमेरिकी डॉलर में होता आया है, और यही डॉलर की असली ताकत रही है। लेकिन अब मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के एक रणनीतिक समुद्री रास्ते से आई खबर ने इस बादशाहत को सीधी चुनौती दे दी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उसके प्रभाव वाले समुद्री इलाके से तेल के जहाजों को गुजरना है, तो उन्हें टोल टैक्स के रूप में अमेरिकी डॉलर नहीं, बल्कि चीन की मुद्रा ‘युआन’ (Yuan) में भुगतान करना होगा। ईरान के इस एक साहसी फैसले ने न केवल भू-राजनीति में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि चीन के शेयर बाजार को भी 'रॉकेट' बना दिया है।

तेल व्यापार का रास्ता

दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता 'होर्मुज का समुद्री मार्ग' (Strait of Hormuz) माना जाता है। वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। हाल के वर्षों में युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान ने इस रास्ते पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब यहां से गुजरने वाले विशाल तेल टैंकरों से मोटा टोल टैक्स वसूल रहा है। यह शुल्क लगभग 1 डॉलर प्रति बैरल निर्धारित किया गया है। एक बड़े तेल के जहाज (VLCC) की क्षमता करीब 20 लाख बैरल होती है, जिसका मतलब है कि एक जहाज को रास्ता पार करने के लिए लगभग 20 लाख डॉलर के बराबर की भारी-भरकम फीस चुकानी पड़ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि ईरान अब यह भुगतान डॉलर के बजाय चीनी युआन या डिजिटल करेंसी में स्वीकार कर रहा है।

चीन के शेयर बाजार में आया जबरदस्त उछाल

जैसे ही यह खबर फैली कि अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार में चीनी युआन का इतना बड़े पैमाने पर इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है, चीन के शेयर बाजार में जश्न का माहौल बन गया। बीजिंग और ईरान के बीच बढ़ते वित्तीय सहयोग की पुष्टि होते ही सीमा पार भुगतान (Cross-border Payment) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी तेजी देखी गई। शेन्ज़ेन स्टॉक एक्सचेंज में 'सीएनपीसी कैपिटल' जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर 10% तक उछल गए। वहीं, 'लाकाला पेमेंट' और 'शेन्ज़ेन फॉर्म्स सिंट्रॉन' जैसी फिनटेक कंपनियों ने भी करीब 8% से 9.5% तक का तगड़ा मुनाफा दर्ज किया। निवेशकों को लग रहा है कि अब युआन केवल चीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार की मुख्यधारा का हिस्सा बन जाएगा।

डॉलर की बादशाहत के लिए बड़ा खतरा

चीन लंबे समय से 'डी-डॉलरलाइजेशन' (De-dollarization) यानी डॉलर पर दुनिया की निर्भरता कम करने की कोशिश में जुटा था। होर्मुज के रास्ते में युआन का यह अनिवार्य उपयोग चीन के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और चीन के बीच की यह जुगलबंदी वैश्विक पूंजी के प्रवाह को बदल सकती है। जब युद्ध और प्रतिबंधों के कारण डॉलर का इस्तेमाल मुश्किल होता है, तो चीनी करेंसी एक मजबूत और सुरक्षित विकल्प के रूप में उभरती है। यही कारण है कि तेल और पेमेंट से जुड़ी चीनी कंपनियों में विदेशी निवेशक जमकर पैसा लगा रहे हैं। यदि अन्य देश भी इस राह पर चलते हैं, तो आने वाले समय में वैश्विक व्यापार से डॉलर का वर्चस्व पूरी तरह खत्म हो सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article