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Iran Crisis: कच्चे तेल के झटके से पाकिस्तान में दाने-दाने को मोहताज हुए लोग, पढ़ें दर्दनाक दास्तां

पाकिस्तान, पहले से ही महंगाई, करेंसी की कीमत में गिरावट और पैसे की तंगी से जूझ रहा है। अब ईरान युद्ध के चलते तेल की बढ़ती कीमतें तुरंत आर्थिक दबाव बढ़ा रही है। फ्यूल की ज्यादा कीमतों का असर बिजली के टैरिफ, ट्रांसपोर्ट और खेती पर होगा, जिससे आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ेगी और लोगों को घर चलाना मुश्किल होगा।

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पाकिस्तान में भुखमरी

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध से दुनिया की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इस महायुद्ध के चलते कच्चे तेल से लेकर खाने-पीने की चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसका असर दुनियाभर के देशों पर दिखाई देने लगा है। हालांकि, इस संकट से गरीब देशों में खाने की कमी का खतरा पैदा हो गया है। इसका बहुत ही बुरा असर पाकिस्तान जैसे आर्थिक रूप से कमजोर देश पर हुआ है। पाकिस्तानी जनता दाने-दाने की मोहताज हो रही है। पाकिस्तान में फ्री खाने के केंद्रों पर भारी भीड़ उमड़ रही है।

खस्ताहाल इकोनॉमी की और बिगड़ी सेहत

पाकिस्तान अपना 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात से आयात करता है, जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर जाता है। इस इलाके में बढ़ते झगड़े ने उस रास्ते को बंद कर दिया है और पाकिस्तान की पहले से ही कमजोर इकॉनमी को और झटका दिया है। वहीं,वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, देश के 250 मिलियन लोगों में से लगभग आधे गरीब हैं। कच्चे तेल में उछाल से पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमत में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। इससे वहां महंगाई तेजी से बढ़ी है। खाने-पीने के सामान तेजी से महंगे हुए है। इसका बोझ गरीब जनता उठाने में सक्षम नहीं है। वह अब दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।

फ्री के खाने पर बढ़ी निर्भरता

पाकिस्तान में महंगाई बढ़ने और खाने-पीने के सामान की किल्लत के बाद अब गरीब जनता को अब मुफ्त भोजन के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है। इस आर्थिक तंगी से निपटने के लिए सामूहिक इफ्तार भोजन कार्यक्रमों का सहारा लेना पड़ रहा है।

पेट्रोल महंगा होने से लोगों के लिए काम पर जाना या यहां तक कि भोजन वितरण केंद्रों तक पहुंचना भी मुश्किल बना दिया है। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण एक चेन रिएक्शन शुरू हो गया है, जिससे खाने-पीने की चीजों और जरूरी सामान की कीमतें बढ़ गई हैं। कुछ लोग तो लंबी दूरी पैदल चलकर तय कर रहे हैं क्योंकि वे अपने वाहनों के लिए ईंधन का खर्च नहीं उठा सकते। आम नागरिकों का कहना है कि उनका बजट अब उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी नहीं है, जिसके चलते उन्हें भोजन खरीदने में बहुत ही मुश्किल आ रही है।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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