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ईरान युद्ध का कच्चे तेल पर ही नहीं, प्लास्टिक से लेकर पैकेजिंग तक की पूरी सप्लाई चेन पर संकट, समझें कैसे

Global Supply Chain Disrupted: ईरान और अमेरिका-इजराइल युद्ध ने केवल तेल ही नहीं, बल्कि तेल से बनने वाले सभी उत्पादों की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। सात देशों में पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल, एल्युमिनियम, प्लास्टिक और ऑलेफिन उद्योग बाधित हुए हैं। पिछले 12 दिनों में 13 अप्रत्याशित आपदा की घोषणाएं हुईं, जिनमें कतर एनर्जी, सऊदी अरामको, कुवैत पेट्रोलियम, बैपको और एल्युमिनियम बहरीन शामिल हैं।

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ईरान और अमेरिका-इजराइल युद्ध का असर (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Global Supply Chain Disrupted: ईरान-अमेरिका और इजराइल युद्ध ने सिर्फ कच्चे तेल पर ही असर नहीं डाला, बल्कि क्रूड ऑयल से बनने वाले बहुत सारे प्रोडक्ट्स की सप्लाई चेन को भी हिला दिया है। पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्रीज, एल्युमिनियम स्मेल्टर्स, प्लास्टिक उत्पादक, ऑलेफिन क्रैकर्स और स्टाइरीन निर्माता 7 देशों में इनकी सप्लाई बाधित हो गई है। पिछले 12 दिनों में 13 कई देशों द्वारा अप्रत्याशित आपदा (Force Majeure) की घोषणाएं हो चुकी हैं। कतर एनर्जी (QatarEnergy) ने एलएनजी पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दी, जिससे वैश्विक सप्लाई का 20% हिस्सा प्रभावित हुआ। सऊदी अरामको (Saudi Aramco) ने दो फील्ड्स का उत्पादन घटाया और रस तनूरा (Ras Tanura) रिफाइनरी बंद कर दी। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने कच्चे तेल की बिक्री पर अप्रत्याशित आपदा लगाया। बहरीन की बैपको (Bapco) ने अपनी एकमात्र रिफाइनरी की सप्लाई रोक दी। एल्युमिनियम बहरीन (Aluminium Bahrain) ने अपनी बड़ी स्मेल्टर से शिपमेंट रोक दी।

स्वतंत्र विश्लेषक, अर्थव्यवस्था, भू-राजनीति, एआई, विज्ञान के क्षेत्र में गरही समझ रखने वाले शनाका एंसलम परेरा ने अपने एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल पर ईरान संकट के चलते तमाम चीजों पर पड़ने वाले असर को विस्तार से बताया है। आइए समझते हैं कि कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से कहां-कहां और किन चीजों पर बुरा असर हुआ है।

आपूर्ति सीरीज पर प्रभाव

इन घोषणाओं का असर तुरंत आगे की इंडस्ट्रीज पर पड़ा। सिंगापुर की पीसीएस (PCS) ने 5 मार्च को अपने ऑलेफिन क्रैकिंग प्लांट के लिए अप्रत्याशित आपदा घोषित किया, क्योंकि इसका फीडस्टॉक उपलब्ध नहीं था। इसके बाद टीपीसी सिंगापुर (TPC Singapore) ने अप्रत्याशित आपदा की घोषणा की। दक्षिण कोरिया की योचुन एनसीसी (Yeochun NCC), ताइवान की फॉर्मोसा पेट्रोकेमिकल (Formosa Petrochemical), इंडोनेशिया की चंद्रा आसरी (Chandra Asri) और टीपीआईए (TPIA), थाईलैंड की एससीसी रायॉन्ग (SCC Rayong Olefins) और कुवैत की टीकेएससी (TKSC) जैसी कंपनियां भी प्रभावित हुईं।

हर अप्रत्याशित आपदा की घोषणा अगले प्लांट को प्रभावित करती है। ऑलेफिन क्रैकर नफ़्था नहीं पाता तो पॉलीएथिलीन प्लांट काम नहीं कर पाता। पॉलीएथिलीन प्लांट बंद होने पर पैकेजिंग निर्माता प्रभावित होता है। पैकेजिंग निर्माता फूड कंपनियों को सप्लाई नहीं कर पाता और कीमतें बढ़ जाती हैं। यह असर सुपरमार्केट तक पहुंच जाता है।

रोजमर्रा की चीजें महंगी

एशिया में पॉलीप्रोपलीन के दाम बढ़ाए गए या पूरी तरह निलंबित किए गए हैं। स्पॉट प्रीमियम $50 से $100 प्रति टन तक बढ़ गए हैं। यूरोप में पॉलीएथिलीन और पॉलीप्रोपलीन के ठेके 60 से 200 यूरो प्रति टन तक महंगे हो गए हैं। ये प्लास्टिक मेडिकल डिवाइसेस, फूड पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, कंस्ट्रक्शन मैटेरियल, पाइप और इलेक्ट्रिकल इंसुलेशन में इस्तेमाल होती हैं अर्थात रोजमर्रा की जिंदगी में हर जगह।

बीमा और लॉजिस्टिक्स की भूमिका

इस सप्लाई चेन की समस्या का मूल कारण बीमा और लॉजिस्टिक्स है। सात P&I क्लबों ने 5 मार्च को वॉर-रिस्क कवरेज रद्द कर दी। इससे टैंकरों का चलना व्यावसायिक रूप से असंभव हो गया। टैंकर जो खाड़ी से नफ्था लेकर एशिया जाते थे, वे रुके। ऑलेफिन क्रैकर्स फीडस्टॉक के बिना काम नहीं कर सकते। पॉलीएथिलीन प्लांट्स बंद हो गए। यह पूरी सीरीज सिर्फ रिफाइनरी या तेल की कीमत पर निर्भर नहीं करती। भले ही ब्रेंट क्रूड का दाम $94 पर आ गया हो, पहले बंद हुए प्लांट्स तभी शुरू होंगे जब टैंकर बीमा प्राप्त कर सकें और नफ्था समय पर पहुंच सके। इस प्रक्रिया में 12 से 24 महीने का समय लग सकता है।

युद्ध का व्यापक असर

यह युद्ध सिर्फ एक जलमार्ग को बंद नहीं कर रहा है। यह आधी दुनिया के मैन्युफैक्चरिंग बेस को प्रभावित कर रहा है। खाड़ी का तेल नफ्था बनता है। नफ्था प्लास्टिक में बदलता है। प्लास्टिक हमारी रोजमर्रा की चीजों में बदलती है। 13 अप्रत्याशित आपदा सात देश, एक बीमा तंत्र और एक कासकेड (Cascade) जो अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यही इस संकट की कहानी है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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