दुनिया पहले से ही ऊर्जा संकट और बढ़ती महंगाई से जूझ रही थी कि अब मिडिल ईस्ट से आई एक खबर ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मचा दिया है। ईरान ने कतर के सबसे जरुरी गैस प्लांट 'रास लफान' (Ras Laffan) को निशाना बनाने की खबरों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को सदमे में डाल दिया है। रास लफान कोई साधारण गैस प्लांट नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की एलएनजी (LNG) सप्लाई की रीढ़ की हड्डी माना जाता है। इस प्लांट पर हमले का सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में न केवल उद्योगों के लिए गैस महंगी होगी, बल्कि आपके किचन में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी (LPG) सिलेंडर और गाड़ियों की सीएनजी (CNG) की कीमतों में भी भारी उछाल आ सकता है।
कतर की अर्थव्यवस्था
रास लफान की अहमियत को समझने के लिए इसके आकार और क्षमता को जानना जरूरी है। कतर दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक देश है और उसकी इस बादशाहत का केंद्र यही रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी है। दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार (North Field) स्थित है। इस प्लांट से निकलने वाली गैस यूरोप से लेकर एशिया तक के दर्जनों देशों की बिजली की जरूरतों और उद्योगों को चलाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस प्लांट के प्रोडक्शन या एक्सपोर्ट में थोड़ी भी बाधा आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें रातों-रात दोगुनी हो सकती हैं। कतर की पूरी अर्थव्यवस्था इसी एक प्लांट पर टिकी है, इसीलिए इसे 'कतर की जान' कहा जाता है।
कतर ने साल 2025 में रास लफान से 81 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी का उत्पादन किया। पिछले साल के बजट में कतर को गैस और तेल से कुल 42 बिलियन डॉलर की आय हुई थी, जिसका एक बड़ा हिस्सा अकेले इसी प्लांट से आया। संक्षेप में कहें तो, रास लफान ही कतर की दौलत, विकास और दुनिया भर में उसकी मजबूत स्थिति का सबसे बड़ा आधार है।
क्यों बढ़ सकती है महंगाई
ईरान द्वारा इस प्लांट को निशाना बनाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे तनाव के बीच, ऊर्जा केंद्रों पर हमला करना वैश्विक शक्तियों पर दबाव बनाने का सबसे बड़ा हथियार है। रास लफान पर हमला होने से न केवल सप्लाई चेन बाधित हुई है, बल्कि समुद्री रास्तों (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) पर भी खतरा बढ़ गया है। गैस ले जाने वाले जहाजों (LNG Tankers) का बीमा और सुरक्षा खर्च बढ़ गया है, जिसका सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ना तय है। दुनिया के कई देशों में पहले से ही एलपीजी की कमी चल रही है, ऐसे में यह हमला 'कोढ़ में खाज' जैसा साबित हो रहा है।
भारत के लिए क्यों है झटका
भारत के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। भारत अपनी जरूरत की लगभग 40 से 50 फीसदी एलएनजी कतर से ही आयात करता है। भारत और कतर के बीच गैस सप्लाई को लेकर लंबे समय के समझौते हैं, जो हमारे फर्टिलाइजर प्लांट, पावर स्टेशन और घरेलू गैस सप्लाई को सुनिश्चित करते हैं। रास लफान में आई किसी भी तकनीकी खराबी या हमले के कारण हुई देरी से भारत के शहरों में सीएनजी की किल्लत हो सकती है और पाइप वाली रसोई गैस (PNG) के दाम बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, बिजली उत्पादन की लागत बढ़ने से बिजली बिल में भी बढ़ोत्तरी की आशंका बनी हुई है।
रास लफान पर हुए इस हमले ने 'एनर्जी सिक्योरिटी' (ऊर्जा सुरक्षा) पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो कतर को अपनी गैस सप्लाई फोर्स मेज्योर (Force Majeure) के तहत रोकनी पड़ सकती है, जिसका मतलब है कि वह समझौतों के बावजूद गैस देने की स्थिति में नहीं होगा। ऐसी स्थिति में दुनिया भर के देशों को रूस या अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों की ओर भागना होगा, जहां पहले से ही कीमतें आसमान पर हैं। यह स्थिति न केवल महंगाई बढ़ाएगी, बल्कि वैश्विक मंदी (Global Recession) के खतरे को भी और नजदीक ले आएगी।
