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RBI MPC : आम आदमी को झटका! रिजर्व बैंक का अनुमान, महंगाई बढ़ेगी, GDP घटेगी

रिजर्व बैंक की MPC समिति ने भले ही रेपो रेट स्थिर रखते हुए बड़ी राहत दी है लेकिन महंगाई बढ़ने का अनुमान बढ़ा दिया है जो आम आदमी के लिए बड़ा झटका है।

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RBI MPC GDP

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में पिछले तीन दिनों से चल रही मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अहम बैठक के नतीजे आ चुके हैं। इस बार केंद्रीय बैंक के सामने कई मोर्चों पर बड़ी और गंभीर चुनौतियां थीं। बाजार और आर्थिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये को संभालने और महंगाई पर लगाम कसने के लिए शायद आरबीआई इस बार ब्याज दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, ज्यादातर आर्थिक मामलों के एक्सपर्ट्स का यही मानना था कि रिजर्व बैंक फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखेगा। उम्मीद के मुताबिक, आरबीआई ने अपनी इस नीति में कोई बदलाव नहीं किया है और रेपो रेट को पुराने स्तर पर ही बरकरार रखा है।

महंगाई का झटका

वहीं, RBI ने आम जनता को बड़ा झटका भी दिया है, रिजर्व बैंक की MPC समिति ने महंगाई का अनुमान बढ़ा दिया है और GDP का अनुमान घटा दिया है। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए देश की वास्तविक जीडीपी (GDP) वृद्धि दर के अनुमान को घटा दिया है। केंद्रीय बैंक ने इसे पहले के 6.9% के अनुमान से कम करके अब 6.6% कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि आरबीआई को अब आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार पहले के मुकाबले थोड़ी धीमी रहने की उम्मीद है। देश की विकास दर के अनुमान में यह कटौती अचानक नहीं की गई है, बल्कि इसके पीछे दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल, वैश्विक अनिश्चितताएं, बढ़ती लागत और बाहरी कड़े आर्थिक हालात जिम्मेदार हैं। इन तमाम वजहों को देखते हुए केंद्रीय बैंक को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा और उनकी टीम ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक कमर्शियल LPG, बेस मेटल्स, प्लास्टिक, रबर और अन्य औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव बना हुआ है। इन जरूरी इनपुट्स के महंगे होने से उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिसका असर आने वाले समय में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। बता दें रिजर्व बैंक का महंगाई टारगेट 4 फीसदी है।

RBI के अनुमान के मुताबिक पहली तिमाही में महंगाई 4.2% रह सकती है। दूसरी तिमाही में यह बढ़कर 5.1% होने का अनुमान है। तीसरी व चौथी तिमाही में 5.9% तक पहुंच सकती है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि फिलहाल महंगाई को लेकर जोखिम और राहत दोनों की संभावनाएं लगभग बराबर हैं।

क्यों बढ़ेगी महंगाई?

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की आर्थिक सेहत का ब्योरा देते हुए दो बड़ी चिंताओं का जिक्र किया है महंगी एनर्जी (ऊर्जा) और लंबे समय से चला आ रहा सप्लाई चेन का संकट। गवर्नर ने साफ शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा की ऊंची कीमतों के साथ-साथ सप्लाई चेन में बनी रुकावटों का असर अब हमारी अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। इसी वजह से जहाँ एक तरफ आर्थिक विकास यानी जीडीपी के अनुमान को नीचे करना पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ आने वाले समय में महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। अप्रैल महीने की मौद्रिक नीति के बाद से दुनिया भर के हालातों में तेजी से बदलाव आया है। वैश्विक स्तर पर हो रहे इन बदलावों ने उद्योगों के लिए कच्चे माल और उत्पादन की लागत (Cost Pressure) को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है, जिसका दबाव आने वाले समय में भारतीय बाजार और आम जनता पर भी महसूस हो सकता है।

GDP का अनुमान घटाया

इन तमाम चिंताओं और लागत बढ़ने के बावजूद, रिजर्व बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर पूरा भरोसा जताया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि दुनिया के कुछ हिस्सों में युद्ध और तनाव शुरू होने के बाद भी भारत की आंतरिक आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह स्थिर और मजबूत बनी हुई हैं। हमारी अर्थव्यवस्था ने बाहरी झटकों और वैश्विक तनावों का डटकर मुकाबला किया है। हालांकि, वे इस बात को भी नहीं छुपाते कि अब ऊर्जा और अन्य जरूरी कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर धीरे-धीरे जमीन पर दिखाई देने लगा है। लागत बढ़ने और सप्लाई चेन बाधित होने से आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार थोड़ी सुस्त पड़ सकती है, लेकिन कुल मिलाकर भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद अभी भी बहुत मजबूत है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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