Gems And Jewellery Exports : भारत के रत्न और आभूषण निर्यात में इस साल मार्च के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मिडिल ईस्ट संघर्ष ( West Asia conflict impact) असर दिख रहा है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के अनुसार, मार्च में कुल निर्यात 35.23 प्रतिशत घटकर 2,771.74 करोड़ डॉलर (लगभग 2,44,827 करोड़ रुपये) रह गया। यह गिरावट पिछले साल की तुलना में काफी बड़ी मानी जा रही है और उद्योग के लिए चिंता का विषय है।
पिछले साल की तुलना में स्थिति
जीजेईपीसी के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2025 में कुल रत्न और आभूषण निर्यात 2,866 करोड़ डॉलर (करीब 2,42,559 करोड़ रुपये) था। यानी एक साल के भीतर निर्यात में स्पष्ट गिरावट देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव और लॉजिस्टिक्स समस्याओं ने इस सेक्टर को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।
पश्चिम एशिया संघर्ष बना मुख्य कारण
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक जीजेईपीसी के चेयरमैन किरीट भंसाली ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सीधा असर भारतीय निर्यात पर पड़ा है। उनके अनुसार, युद्ध की स्थिति के कारण कई अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट समय पर नहीं भेजे जा सके। लॉजिस्टिक्स व्यवस्था बाधित हुई और बीमा लागत भी काफी बढ़ गई। उन्होंने कहा कि जोखिम बढ़ने के कारण बीमा प्रीमियम में तेज उछाल आया, जिससे निर्यातकों की लागत बढ़ी और ऑर्डर प्रभावित हुए। कई हीरा पार्सल समय पर विदेश नहीं पहुंच पाए, जिससे व्यापार में बाधा आई।
पॉलिश्ड डायमंड निर्यात में भी भारी गिरावट
सिर्फ कुल निर्यात ही नहीं, बल्कि तराशे और पॉलिश किए गए हीरों (सीपीडी) के निर्यात में भी तेज गिरावट देखी गई। मार्च में इस श्रेणी का निर्यात 27.48 प्रतिशत घटकर 83.87 करोड़ डॉलर (लगभग 7,798 करोड़ रुपये) रह गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 115.66 करोड़ डॉलर (करीब 10,002 करोड़ रुपये) था। इस गिरावट से साफ है कि हीरा उद्योग के मुख्य हिस्से पर भी वैश्विक तनाव का असर गहराई से पड़ा है।
यूएई और अनगढ़ हीरा कारोबार में अवसर
हालांकि मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता के बीच उद्योग को नए अवसर भी नजर आ रहे हैं। जीजेईपीसी चेयरमैन किरीट भंसाली ने कहा कि भारत अनगढ़ (रफ) हीरा कारोबार का बड़ा केंद्र बन सकता है। उन्होंने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की कंपनियां भारत में रफ डायमंड कारोबार शुरू करने में गहरी रुचि दिखा रही हैं। 2020 के बाद से यूएई इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण हब के रूप में उभरा है, और अब भारत की नजदीकी और मजबूत बुनियादी ढांचे के कारण यह कारोबार और बढ़ सकता है।
भारत के लिए संभावित नया हब बनने की संभावना
भंसाली के अनुसार, अगर सरकार की तरफ से नीतिगत समर्थन मिलता है तो भारत रफ डायमंड ट्रेडिंग का बड़ा वैश्विक केंद्र बन सकता है। भारत पहले से ही हीरा पॉलिशिंग का एक प्रमुख केंद्र है, इसलिए पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने का अवसर देश के पास मौजूद है।
अमेरिकी टैरिफ का असर कम हुआ
उद्योग प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्कों (टैरिफ) का असर अब पहले की तुलना में कम हो गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि जीजेईपीसी और निर्यातकों ने नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तलाश कर ली है। इससे कुछ हद तक नुकसान की भरपाई संभव हुई है।
कुल मिलाकर, रत्न और आभूषण निर्यात क्षेत्र इस समय वैश्विक तनाव और लॉजिस्टिक्स बाधाओं के कारण दबाव में है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सही नीतियों और नए अंतरराष्ट्रीय अवसरों के साथ भारत इस चुनौती को अवसर में बदल सकता है और वैश्विक हीरा कारोबार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
