India Forex Reserves : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 22 मई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.51 अरब डॉलर घटकर 681.38 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 8.09 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई थी और यह 688.89 अरब डॉलर पर आ गया था। लगातार दूसरे सप्ताह आई इस बड़ी गिरावट ने विदेशी मुद्रा भंडार के स्तर को और नीचे ला दिया है।
रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आया भंडार
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस वर्ष 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 728.49 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। उस समय देश के पास विदेशी मुद्रा का रिकॉर्ड भंडार मौजूद था। हालांकि, इसके बाद वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितताओं के कारण विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट का दौर शुरू हो गया। अब यह भंडार अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुका है।
पश्चिम एशिया संकट का पड़ा असर
एक्सपर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और संघर्ष का असर भारतीय मुद्रा बाजार पर भी देखने को मिला। इस दौरान रुपये पर दबाव बढ़ा और उसकी कीमत में कमजोरी आने लगी। रुपये को अधिक गिरने से बचाने के लिए आरबीआई को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा। केंद्रीय बैंक ने डॉलर बेचकर बाजार में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की। इसी वजह से विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार कमी दर्ज की गई।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में भी गिरावट
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (Foreign Currency Assets) होती हैं। 22 मई को समाप्त सप्ताह में यह हिस्सा 2.87 अरब डॉलर घटकर 543.03 अरब डॉलर रह गया। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में डॉलर के अलावा यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं भी शामिल होती हैं। इन परिसंपत्तियों के मूल्य में केवल खरीद-बिक्री का ही असर नहीं पड़ता, बल्कि विभिन्न विदेशी मुद्राओं के विनिमय दरों में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव पड़ता है। इसलिए कई बार वैश्विक मुद्रा बाजार में बदलाव के कारण भी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का मूल्य घट या बढ़ सकता है।
स्वर्ण भंडार में सबसे बड़ी कमी
इस अवधि में भारत के स्वर्ण भंडार यानी गोल्ड रिजर्व के मूल्य में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। आरबीआई के अनुसार, स्वर्ण भंडार का मूल्य 4.53 अरब डॉलर घटकर 114.79 अरब डॉलर रह गया। सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और मूल्यांकन में बदलाव का असर इसके कुल मूल्य पर पड़ता है। विदेशी मुद्रा भंडार में आई कुल गिरावट में स्वर्ण भंडार की कमी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
एसडीआर और आईएमएफ आरक्षित स्थिति भी घटी
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य घटकों में भी कमी दर्ज की गई। विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights- SDR) 7.7 करोड़ डॉलर घटकर 18.75 अरब डॉलर रह गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की आरक्षित स्थिति भी 3.3 करोड़ डॉलर घटकर 4.82 अरब डॉलर पर पहुंच गई। ये दोनों घटक विदेशी मुद्रा भंडार का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा होते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता और आपातकालीन जरूरतों के लिहाज से इनका भी विशेष महत्व माना जाता है।
विदेशी मुद्रा बचाने पर पहले भी हुई अपील
देश में विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने के लिए समय-समय पर बचत और संतुलित उपयोग पर जोर दिया जाता रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पहले कई अवसरों पर लोगों से विदेशी यात्राएं कम करने, ईंधन की खपत घटाने और अनावश्यक सोने की खरीदारी से बचने की अपील कर चुके हैं। इन उपायों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा की मांग को नियंत्रित करना और देश के भंडार को मजबूत बनाए रखना है।
आगे की स्थिति पर रहेगी नजर
लगातार दो सप्ताह से विदेशी मुद्रा भंडार में आई बड़ी गिरावट के बाद अब बाजार और निवेशकों की नजर आरबीआई के अगले आंकड़ों पर रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय तनाव आने वाले समय में विदेशी मुद्रा भंडार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, लेकिन हाल की गिरावट ने नीति निर्माताओं और बाजार विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर जरूर खींचा है।
