भारत में वित्तीय लेन-देन और टैक्स से जुड़े कामों के लिए पैन कार्ड (PAN) हमेशा से सबसे जरूरी दस्तावेजों में से एक रहा है। बैंक खाता खुलवाना हो, प्रॉपर्टी खरीदनी हो या फिर भारी-भरकम कैश ट्रांजैक्शन करना हो, हर जगह पैन कार्ड नंबर देना अनिवार्य होता है। लेकिन समय के साथ सरकार और इनकम टैक्स विभाग अपनी नीतियों को और अधिक डिजिटल और यूजर-फ्रेंडली बना रहे हैं। इसी कड़ी में वर्ष 2026 के नए नियमों (PAN Rules 2026) के तहत टैक्सपेयर्स और आम नागरिकों को एक बहुत बड़ी राहत दी गई है। अब सरकार ने ऐसी 8 वित्तीय गतिविधियों और लेन-देन की पहचान की है, जहां आपको अपना पैन कार्ड दिखाने या उसका नंबर दर्ज करने की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य छोटे स्तर पर व्यापार करने वालों और रोजमर्रा के लेन-देन करने वाले आम लोगों के लिए कागजी कार्रवाई और तकनीकी उलझनों को कम करना है।
क्यों खत्म हुई पैन कार्ड की जरुरत
इन नए बदलावों को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर सरकार ने इन 8 ट्रांजैक्शंस में पैन कार्ड की जरूरत को क्यों खत्म किया है। दरअसल, वर्तमान समय में ज्यादातर बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट और वित्तीय सेवाएं पहले से ही बायोमेट्रिक डेटा या अन्य केंद्रीय पहचान प्रणालियों से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में टैक्स चोरी को रोकने और सिस्टम में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर छोटी जगह पर पैन कार्ड मांगना अब उतना जरूरी नहीं रह गया है। नए नियमों के अनुसार, छोटे मूल्य के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), कुछ खास तरह के यूटिलिटी बिलों के भुगतान, एक तय सीमा के भीतर स्थानीय स्तर पर की जाने वाली खरीदारी और कुछ विशिष्ट सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभों के लिए अब पैन कार्ड सबमिट करने की बाध्यता नहीं रहेगी। इससे ग्रामीण इलाकों और कम आय वर्ग वाले लोगों को बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने में काफी आसानी होगी।
इन 8 कामों में नहीं चाहिए पैन कार्ड
कैश जमा और निकासी के नियमबैंक में एक ही दिन में 50 हजार रुपये से ज्यादा कैश जमा करने पर जो पैन कार्ड की अनिवार्यता थी, उसे अब पूरी तरह हटा दिया गया है। इसके साथ ही, सालाना कैश जमा की रिपोर्टिंग सीमा को भी 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 10 लाख रुपये कर दिया गया है। हालांकि, बड़े कैश ट्रांजैक्शन पर नजर रखने के लिए सालभर में 10 लाख रुपये से ज्यादा की नकद निकासी को अब पैन रिपोर्टिंग के दायरे में लाया गया है।
प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री की सीमा में बदलाव
रियल एस्टेट सेक्टर में छोटे खरीदारों को राहत देते हुए अब संपत्ति की खरीद या बिक्री पर पैन कार्ड दिखाने की अनिवार्य सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, आयकर विभाग को दी जाने वाली प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग सीमा भी अब 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 45 लाख रुपये हो गई है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों को कागजी कार्रवाई में थोड़ी राहत मिलेगी।
45 लाख से अधिक की प्रॉपर्टी डील पर सख्ती
नए नियमों के मुताबिक, अगर आप 45 लाख रुपये से ज्यादा मूल्य की कोई प्रॉपर्टी डील करते हैं, तो वहाँ पैन कार्ड देना पूरी तरह अनिवार्य होगा। पहले कई मामलों में लोग पैन कार्ड न होने पर Form 60 जमा करके काम चला लेते थे, लेकिन अब सरकार ने इस छूट को पूरी तरह खत्म कर दिया है। खास बात यह है कि अब गिफ्ट डीड (उपहार दस्तावेज) और जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA) को भी इसी सख्त दायरे में शामिल किया गया है।
विदेश यात्रा और फॉरेक्स नियम
सरकार ने विदेश यात्रा के खर्चों और विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) की खरीद के लिए पहले से तय अलग पैन कैटेगरी को पूरी तरह हटा दिया है। हालांकि, विदेशी लेन-देन को पूरी तरह ट्रैक करने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि यदि किसी एक ट्रांजैक्शन में 2 लाख रुपये से ज्यादा खर्च होता है, तो उसे सामान और सेवाओं की खरीद वाली सामान्य कैटेगरी में रिपोर्ट किया जा सकता है। इसके अलावा, फॉरेक्स लेन-देन के लिए पैन कार्ड होने और न होने की स्थिति के आधार पर अलग-अलग रिपोर्टिंग लिमिट तय की गई हैं।
इंश्योरेंस प्रीमियम और स्टांप पेपर पर बढ़ी निगरानी
अब इंश्योरेंस कंपनियों के लिए आयकर विभाग को प्रीमियम भुगतान की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत, यदि किसी पॉलिसीधारक के पास पैन कार्ड है, तो 5 लाख रुपये से अधिक के प्रीमियम पर और यदि पैन कार्ड नहीं है, तो 2.5 लाख रुपये से अधिक के प्रीमियम भुगतान की रिपोर्टिंग सीधे विभाग को की जाएगी। इसी तरह, स्टांप पेपर की खरीद पर भी नजर रखने के लिए पैन धारकों हेतु 2 लाख रुपये और बिना पैन वालों के लिए 1 लाख रुपये की सीमा तय कर दी गई है।
होटल, बैंक्वेट हॉल और इवेंट पेमेंट का दायरा बढ़ा
होटल और रेस्टोरेंट में भारी-भरकम नकद भुगतान करने वालों के लिए पैन कार्ड देने की सीमा को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर अब 1 लाख रुपये कर दिया गया है। राहत के साथ-साथ सरकार ने इसकी निगरानी बढ़ाने के लिए अब बैंक्वेट हॉल, मैरिज होम, कन्वेंशन सेंटर और इवेंट मैनेजर्स को भी इस नियम के दायरे में शामिल कर लिया है, ताकि बड़े आयोजनों और शादियों में होने वाले भारी नकद लेन-देन पर पैनी नजर रखी जा सके।
वाहन खरीद और बैंक ड्राफ्ट के नियमों में संशोधन
5 लाख रुपये से अधिक कीमत की गाड़ियों को खरीदने पर पैन कार्ड की अनिवार्यता पहले की तरह ही लागू रहेगी, लेकिन अब इस नियम के तहत दोपहिया वाहनों (टू-व्हीलर्स) को भी शामिल कर लिया गया है, जबकि किसानों को राहत देते हुए ट्रैक्टर की खरीद को इससे बाहर रखा गया है। इसके अलावा, आम जनता को राहत देते हुए बैंक ड्राफ्ट, पे ऑर्डर या बैंकर्स चेक बनवाने के लिए रोजाना पैन कार्ड दिखाने की मजबूरी को खत्म कर दिया गया है, हालांकि इस पर सालाना स्तर पर निगरानी जारी रहेगी।
Form 60 की विदाई और नया Form 97
जिन लोगों के पास पैन कार्ड नहीं है, उनके लिए पहले इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक Form 60 को अब बंद कर दिया गया है और उसकी जगह एक नया Form 97 लागू किया गया है। लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि 45 लाख रुपये से अधिक की बड़ी प्रॉपर्टी डील्स में यह नया Form 97 भी काम नहीं आएगा; ऐसी बड़ी जील्स के लिए हर हाल में पैन कार्ड होना ही अनिवार्य रहेगा। सरकार का स्पष्ट मानना है कि इन बदलावों से छोटे लेन-देन आसान होंगे और बड़े वित्तीय सौदों पर नियंत्रण मजबूत होगा।
