Foreign Exchange Reserves : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 20 फरवरी को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2.11 अरब डॉलर घट गया। इसके बाद कुल भंडार 723.60 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले 6 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 8.66 अरब डॉलर बढ़कर 725.72 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। यानी एक सप्ताह पहले जहां भंडार रिकॉर्ड स्तर पर था, वहीं अगले ही सप्ताह इसमें गिरावट दर्ज की गई।
विदेशी मुद्रा एसेट्स में कमी
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक रिजर्व बैंक के अनुसार, कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (एफसीए) होती हैं। 20 फरवरी को समाप्त सप्ताह में ये परिसंपत्तियां 1.03 अरब डॉलर घटकर 572.56 अरब डॉलर रह गईं। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों को डॉलर में दर्शाया जाता है। इसमें भारत के भंडार में रखी गई अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं जैसे यूरो, पाउंड और येन के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है। इसलिए इन मुद्राओं की कीमतों में बदलाव का सीधा प्रभाव कुल विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।
गोल्ड रिजर्व का मूल्य घटा
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान देश के स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिजर्व) के मूल्य में भी कमी आई। आरबीआई के मुताबिक, सोने का भंडार 97.7 करोड़ डॉलर घटकर 127.48 अरब डॉलर रह गया। सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण इसके कुल मूल्य में बदलाव आता है। स्वर्ण भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है, क्योंकि यह आपात स्थिति में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।
विशेष आहरण अधिकार (SDR) में गिरावट
रिजर्व बैंक ने बताया कि विशेष आहरण अधिकार यानी एसडीआर में भी कमी आई है। यह 8.4 करोड़ डॉलर घटकर 18.84 अरब डॉलर रह गया। एसडीआर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा सदस्य देशों को दिया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय रिजर्व एसेट है, जिसका उपयोग जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा की तरह किया जा सकता है।
आईएमएफ में आरक्षित भंडार
आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार भी 1.8 करोड़ डॉलर घटकर 4.71 अरब डॉलर रह गया। यह राशि भी देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा होती है।
क्या होता है विदेशी मुद्रा भंडार?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिति का अहम पैमाना होता है। इसका उपयोग आयात भुगतान, विदेशी कर्ज चुकाने और मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में किया जाता है। भंडार में बढ़ोतरी देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाती है, जबकि गिरावट कई कारणों से हो सकती है, जैसे विदेशी निवेश में कमी, मुद्रा विनिमय दर में बदलाव या अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव। कुल मिलाकर, 20 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, इसके बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अब भी मजबूत स्थिति में बना हुआ है।
