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भारतीय बाजार बंद, KOSPI 8% Nikkei 4% फिसला, क्यों मची अफरा-तफरी?

भारतीय शेयर बाजार आज भले ही बंद है। लेकिन, दुनियाभर के बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है। दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क इंडेक्स KOSPI जहां 8% तक लुढ़क गया है। वहीं, NIKKEI 4% लुढ़ककर कारोबार कर रहा है।

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वैश्विक बाजारों में बड़ी गिरावट

GLOBAL SHARE MARKET TODAY : आज 26 जून को भारतीय शेयर बाजार मुहर्रम के चलते बंद है। लेकिन, दुनियाभर के बाजारों में आज तेज बिकवाली देखने को मिली है। दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 8% और जापान का Nikkei 225 लगभग 4% तक टूट गया। हांगकांग, ताइवान और चीन के बाजार भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। हालांकि, इससे पहले गुरुवार 25 जून को यूरोपीय बाजार मजबूती के साथ बंद हुए, जबकि अमेरिकी बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। इस तेज गिरावट ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

आखिर अचानक क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

विश्लेषकों के मुताबिक एशियाई बाजारों की इस बिकवाली के पीछे एक नहीं, बल्कि कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं। सबसे बड़ी वजह टेक्नोलॉजी और एआई (AI) शेयरों में मुनाफावसूली मानी जा रही है। पिछले कुछ महीनों में दक्षिण कोरिया और जापान के चिप तथा AI शेयरों में रिकॉर्ड तेजी आई थी। अब निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफा वसूल रहे हैं, जिससे पूरे बाजार पर दबाव बढ़ गया है। दक्षिण कोरिया का बाजार खास तौर पर Samsung Electronics और SK Hynix जैसे चिप शेयरों पर काफी निर्भर है, इसलिए इन शेयरों में बिकवाली का असर पूरे KOSPI पर दिख रहा है।

उधारी पड़ रही भारी

दूसरी वजह हाई-लीवरेज ट्रेडिंग है। हाल के महीनों में दक्षिण कोरिया में बड़ी संख्या में रिटेल निवेशकों ने उधार लेकर निवेश किया था। जैसे ही शेयरों में गिरावट शुरू हुई, कई निवेशकों को मजबूरन अपनी पोजिशन काटनी पड़ी, जिससे बिकवाली और तेज हो गई। दक्षिण कोरिया के नियामकों की ओर से लीवरेज्ड निवेश को लेकर दी गई चेतावनियों ने भी बाजार की घबराहट बढ़ाई। तीसरी वजह यह है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बना रहे हैं। अमेरिकी बाजारों में भी टेक शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, जिसका असर एशियाई बाजारों पर पड़ा।

यूरोप-अमेरिका मिलेजुले

जहां एशिया में भारी बिकवाली रही, वहीं यूरोप के प्रमुख बाजार मजबूती के साथ बंद हुए। जर्मनी का DAX 1% से ज्यादा चढ़ा, जबकि ब्रिटेन का FTSE और फ्रांस का CAC 40 भी बढ़त के साथ बंद हुए। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल बिकवाली का दबाव मुख्य रूप से एशियाई टेक शेयरों तक सीमित है। अमेरिका में S&P 500 लगभग सपाट रहा, जबकि Nasdaq में हल्की गिरावट दर्ज की गई। निवेशक अभी भी महंगाई, ब्याज दरों और टेक शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर सतर्क बने हुए हैं।

तेल और सोने में भी नरमी

कमोडिटी बाजार में ब्रेंट क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया, जबकि WTI भी करीब 71 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। सोने की कीमतों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। मध्य-पूर्व में आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम होने से कच्चे तेल पर दबाव बना हुआ है।

भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?

भारतीय बाजार बंद होने के बाद मिले ये ग्लोबल संकेत अगले कारोबारी सत्र के लिए पूरी तरह सकारात्मक नहीं माने जा रहे हैं। GIFT Nifty भी 100 अंक से ज्यादा कमजोरी के साथ 24,007 अंक के आसपास कारोबार कर रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार की शुरुआत दबाव में हो सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत की खबर है, क्योंकि इससे महंगाई और आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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