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तेल कंपनियों के दोनों हाथों में लड्डू! Indian Basket Crude युद्ध से पहले वाले स्तर तक गिरा

भारतीय बास्केट में क्रूड ऑयल के दाम अब घटकर युद्ध पूर्व स्तर पर पहुंच गया है। PPCA के मुताबिक अब भारतीय रिफाइनरियों की तरफ से खरीदे जा रहे क्रूड की औसत कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है।

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भारतीय बास्केट में घटे क्रूड के दाम

Indian Basket Crude Oil Price : पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण महीनों तक ऊंचाई पर रहने के बाद भारत के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। भारतीय रिफाइनरियों द्वारा खरीदे जाने वाले इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत गिरकर 70.71 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। यह लगभग वही स्तर है, जहां युद्ध शुरू होने से पहले कीमतें थीं। SBI Research के मुताबिक क्रूड के दाम में हर डॉलर के घटने या बढ़ने का सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ता है। हर एक डॉलर की कमी से भारत के आयात बिल में 2 से 2.5 अरब डॉलर तक की राहत मिल सकती है। क्रूड सस्ता होने से महंगाई पर भी लगाम लगती है।

तेल कंपनियों की हुई मौज

फिलहाल, तेल कंपनियों की स्थिति दोनों हाथों में लड्डू लगने जैसी हो गई है। क्योंकि, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का मार्जिन युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में बेहतर हो गया है। क्योंकि, एक तरफ कंपनियों ने डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ाए हैं। वहीं, दूसरी तरफ सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में भी छूट दी है। इस तरह सस्ता क्रूड, कम टैक्स और पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों से सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत हो रही है।

सामान्य स्तर पर लौटा कच्चा तेल

पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था। मार्च और अप्रैल में इंडियन बास्केट क्रूड 113-114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। अब हालात सामान्य होने के साथ कीमतें तेजी से नीचे आई हैं। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी अब करीब 74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि युद्ध के चरम पर यह 120 डॉलर तक पहुंच गया था।

  • महीना (2026) इंडियन बास्केट क्रूड (डॉलर/बैरल) स्थिति
  • फरवरी 69.01 युद्ध से पहले सामान्य बाजार
  • मार्च 113.49 युद्ध शुरू, तेज उछाल
  • अप्रैल 114.48 संकट चरम पर
  • मई करीब 110 हल्की नरमी
  • जून (औसत) 86.31 लगातार गिरावट
  • 26 जून (ताजा) 70.71 युद्ध से पहले वाले स्तर पर वापसी

सरकार और तेल कंपनियों को बड़ी राहत

तेल की कीमतों में इस गिरावट का सीधा फायदा सरकारी खजाने और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को मिलेगा। जब कच्चा तेल 110-115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, तब घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखने के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर भारी दबाव था। अनुमान के मुताबिक उन्हें प्रतिदिन करीब 700 करोड़ रुपये तक का वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा था। अब कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर के आसपास आने से यह दबाव लगभग खत्म हो गया है। इससे कंपनियों का मार्जिन सुधरेगा और आयात बिल भी कम होगा।

क्या अब पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?

यही वह सवाल है जिसका जवाब हर उपभोक्ता जानना चाहता है। लेकिन फिलहाल राहत मिलने में थोड़ा समय लग सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तैयार पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में

रिफाइंड पेट्रोल फिलहाल 110 डॉलर प्रति बैरल और रिफाइंड डीजल लगभग 123 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहे हैं। यानी रिफाइनिंग के बाद तैयार ईंधन अभी भी महंगा है। ऐसे में तेल कंपनियां पहले पिछले महीनों के नुकसान की भरपाई करना चाहेंगी। उसके बाद ही खुदरा कीमतों में कटौती पर फैसला लिया जा सकता है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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