वैश्विक बाजार में भारतीय निर्यातकों को बढ़त दिलाने सरकार का 45,000 करोड़ का बड़ा दांव (तस्वीर-istock)
Export Promotion Mission: सरकार ने बुधवार (13 नवंबर 2025) को निर्यातकों की सहायता के लिए 45,000 करोड़ रुपये के दो बड़े कार्यक्रमों को मंजूरी दी। इन योजनाओं का उद्देश्य अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए उच्च टैरिफ के प्रभाव को कम करना और निर्यात क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सुदृढ़ बनाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया।
इस उप-योजना का उद्देश्य एमएसएमई को किफायती व्यापार वित्त तक पहुंच उपलब्ध कराना है। इसके तहत निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:-
कुल राशि: ₹20,000 करोड़
यह योजना राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से वित्त मंत्रालय द्वारा संचालित की जाएगी। इसके तहत निर्यातकों को 100% ऋण गारंटी दी जाएगी ताकि वे बिना किसी संपार्श्विक (collateral) के ऋण प्राप्त कर सकें। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव की अध्यक्षता में गठित एक प्रबंधन समिति इस योजना के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगी।
सरकार का कहना है कि CGSE और EPM योजनाओं से भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी, नकदी प्रवाह में सुधार होगा और 1,000 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य की दिशा में देश की प्रगति तेज होगी। वर्तमान में उच्च अमेरिकी आयात शुल्क के कारण सितंबर में अमेरिका को भारत का निर्यात 11.93% घटकर 5.46 अरब डॉलर रह गया था।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) ने सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। फियो अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा कि निर्यात संवर्धन मिशन एक व्यापक, परिणाम-आधारित और डिजिटल रूप से संचालित ढांचे के तहत विभिन्न योजनाओं को समेकित करने वाला एक प्रमुख संरचनात्मक सुधार है। यह भारत के व्यापार क्षेत्र के लिए एक व्यावहारिक और दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है।