नए आधार वर्ष 2022-23 की संशोधित श्रृंखला के तहत चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.1 प्रतिशत के करीब रहने की उम्मीद है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में देश की अर्थव्यवस्था आठ प्रतिशत की दर से बढ़ी है।
पिछले महीने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत थी।
जल्द जारी होंगे दूसरे आंकड़े
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी के दूसरे अग्रिम अनुमान 27 फरवरी को जारी किए जाएंगे। इनमें नए आंकड़े और संशोधन शामिल होंगे। इसलिए, पहले और दूसरी तिमाही के सभी पुराने आंकड़े भी नए आधार वर्ष 2022-23 के अनुसार बदल सकते हैं।
भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक अनुसंधान विभाग की रिपोर्ट में कहा गया, "तीसरी तिमाही में देशभर में आर्थिक गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में खपत मजबूत है, जो खेती और गैर-कृषि गतिविधियों से मिले सकारात्मक संकेतों की वजह से है।"
अर्थव्यवस्था में है मजबूती
रिपोर्ट के अनुसार, तीसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर लगभग 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। यह संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है और उत्पादन तथा खपत के स्तर में सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, हाल ही में अपनाई गई नई गणना पद्धति में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों के कारण अंतिम आंकड़ों में किस दिशा में संशोधन होगा, इसका सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। नई पद्धति के प्रभाव से वृद्धि दर में ऊपर या नीचे—दोनों तरह के समायोजन संभव हैं।
इसमें आगे कहा गया कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) की जमा वृद्धि ऋण वृद्धि की तुलना में धीमी बनी हुई है। आरबीआई के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, कुल जमा में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि ऋण में 14.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
(इनपुट-भाषा)
