पब्लिक प्रोविडेंट फंड (Public Provident Fund ) भारत की सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित निवेश योजनाओं में से एक है। सरकार द्वारा समर्थित इस स्कीम में निवेशकों को गारंटीड रिटर्न के साथ टैक्स लाभ भी मिलता है। लंबी अवधि के निवेश और कंपाउंडिंग की पावर के कारण यह योजना रिटायरमेंट या भविष्य के बड़े वित्तीय लक्ष्यों के लिए बेहद लोकप्रिय है। हालांकि, कई निवेशक कुछ सामान्य गलतियां कर बैठते हैं, जिनकी वजह से उन्हें मिलने वाला रिटर्न कम हो सकता है या फिर योजना के महत्वपूर्ण फायदे भी छूट सकते हैं। आइए जानते हैं, PPF खाताधारक को कौन-सी गलतियों (PPF Investment Mistakes) से बचना चाहिए-
हर साल न्यूनतम राशि जमा न करना
पीपीएफ खाते को एक्टिव बनाए रखने के लिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम 500 रुपये जमा करना जरूरी है। अगर आप यह न्यूनतम राशि जमा नहीं करते हैं तो आपका खाता निष्क्रिय (Inactive) हो सकता है। निष्क्रिय खाते में नई राशि जमा नहीं की जा सकती और लोन या आंशिक निकासी जैसी सुविधाएं भी बंद हो जाती हैं। हालांकि खाते में जमा पुरानी राशि पर ब्याज मिलता रहता है।
महीने की 5 तारीख के बाद निवेश करना
पीपीएफ में ब्याज की गणना हर महीने की 5 तारीख और महीने के आखिरी दिन के बीच उपलब्ध न्यूनतम बैलेंस पर की जाती है। अगर आप हर महीने 5 तारीख के बाद पैसा जमा करते हैं तो उस महीने का ब्याज नहीं मिलेगा। इसलिए बेहतर होगा कि हर महीने 5 तारीख से पहले निवेश करें। अगर सालभर की पूरी राशि एकमुश्त निवेश करनी है तो उसे 5 अप्रैल से पहले जमा करना फायदेमंद माना जाता है।
अधिकतम निवेश सीमा का ध्यान न रखना
पीपीएफ में एक वित्तीय वर्ष के दौरान अधिकतम 1.5 लाख रुपये ही जमा किए जा सकते हैं। अगर कोई निवेशक इस सीमा से अधिक राशि जमा कर देता है तो अतिरिक्त रकम पर ब्याज नहीं मिलता और न ही उस पर कोई अतिरिक्त टैक्स लाभ मिलता है। इसलिए निवेश करने से पहले वार्षिक सीमा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
मैच्योरिटी के बाद सही फैसला न लेना
पीपीएफ की मैच्योरिटी अवधि 15 वर्ष होती है। इसके बाद निवेशक के पास राशि निकालने, खाते को बिना निवेश के बढ़ाने या फिर पांच-पांच साल के ब्लॉक में योगदान के साथ आगे बढ़ाने का विकल्प होता है। कई लोग समय पर निर्णय नहीं लेते, जिससे वे आगे मिलने वाले कंपाउंडिंग लाभ से वंचित हो सकते हैं। इसलिए मैच्योरिटी से पहले अपनी वित्तीय जरूरतों के अनुसार योजना बनाना जरूरी है।
समय से पहले खाता बंद करने की जल्दबाजी
पीपीएफ एक लंबी अवधि की निवेश योजना है। अगर कोई निवेशक समय से पहले खाता बंद करता है तो यह केवल निर्धारित विशेष परिस्थितियों में ही संभव है। इसके अलावा समयपूर्व बंद करने पर ब्याज में 1% की कटौती का असर पड़ सकता है, जिससे कुल रिटर्न कम हो जाता है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर पहले आंशिक निकासी या लोन जैसी सुविधाओं पर विचार करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
