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सेंसेक्स को मत देखो, भारत की लॉन्ग टर्म ग्रोथ की कहानी देखो, ऐसा क्यों बोले SBI चेयरमैन सेट्टी

Indian economic growth: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है, जिसमें बड़े निवेश, मैन्युफैक्चरिंग वृद्धि, डिजिटल बैंकिंग और समावेशी विकास प्रमुख भूमिका निभाएंगे।

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भारत दुनिया की सबसे बड़ी विकास गाथाओं में से एक, 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य: SBI चेयरमैन (तस्वीर- istock/ANI)

Indian economic growth : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने कहा है कि भारत अब केवल दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बराबरी करने की कोशिश नहीं कर रहा है, बल्कि 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण विकास गाथाओं में से एक बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आज भारत वैश्विक भविष्य को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बुधवार 3 जून 2026 को सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026 में मुख्य भाषण देते हुए सेट्टी ने कहा कि दुनिया इस समय भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में बदलाव, तकनीकी चुनौतियों और बदलते पूंजी प्रवाह जैसी कई समस्याओं का सामना कर रही है। ऐसे माहौल में भारत स्थिरता, मजबूती और अवसर का बड़ा केंद्र बनकर सामने आया है। उन्होंने निवेशकों को सलाह देते हुए कहा कि सिर्फ सेंसेक्स (Sensex) को मत देखिए, भारत को एक लंबी अवधि की विकास कहानी के रूप में देखिए।

विजन इंडिया 2047 पर जोर

सेट्टी ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2047 तक "विकसित भारत" (विकसित राष्ट्र) बनना है। इसके लिए प्रति व्यक्ति आय को कम से कम 10,000 डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्रामीण विकास, शहरी परिवर्तन और युवाओं में निवेश सबसे बड़ी प्राथमिकताएं होंगी। वर्तमान में देश की करीब 60 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। वहीं, 2050 तक भारत की शहरी आबादी करीब 80 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसके अलावा 2050 तक देश की कामकाजी उम्र की आबादी 1.1 अरब से अधिक होने का अनुमान है। ऐसे में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा।

मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर फोकस

SBI चेयरमैन ने कहा कि भारत को अपनी अर्थव्यवस्था में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ानी होगी। फिलहाल यह करीब 17 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर कम से कम 25 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि भारत को अगले कुछ दशकों में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। SBI के आंतरिक आकलन के अनुसार, वर्ष 2030 तक देश को करीब 200 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता होगी। इसके बाद वित्त वर्ष 2035 तक यह जरूरत बढ़कर 400 से 450 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा परिवर्तन, शहरी विकास, एमएसएमई और नवाचार जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।

बैंकों की भूमिका होगी बेहद अहम

सेट्टी ने कहा कि भारत के विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बैंकिंग क्षेत्र को भी बदलना होगा। भविष्य की बैंकिंग व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो समाज और अर्थव्यवस्था के हर वर्ग तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचा सके। उन्होंने कहा कि बैंक केवल लोन देने वाली संस्थाएं नहीं होंगे, बल्कि बचत को बढ़ावा देने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, पूंजी का सही आवंटन करने और राष्ट्र निर्माण में भागीदार की भूमिका निभाएंगे।

ऊर्जा परिवर्तन के लिए 22 ट्रिलियन डॉलर की जरूरत

भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस बारे में सेट्टी ने कहा कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगभग 22 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के क्षेत्र में भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वर्तमान में देश की 50 प्रतिशत से अधिक बिजली की जरूरतें स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी की जा रही हैं। यह उपलब्धि भारत ने पेरिस समझौते के 2030 लक्ष्य से पांच साल पहले हासिल कर ली है।

बैंकिंग क्षेत्र की मजबूत प्रगति

देश के बैंकिंग क्षेत्र की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए सेट्टी ने कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को दिया जाने वाला लोन वर्ष 2016 के 9.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2026 में करीब 14 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 में कृषि ऋण वितरण 26 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। वहीं, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को दिया गया कुल बकाया ऋण करीब 67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

डिजिटल भुगतान में भारत की बड़ी उपलब्धि

सेट्टी ने डिजिटल इंडिया की सफलता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए हर साल करीब 200 अरब लेनदेन किए जा रहे हैं। SBI अकेले इस कुल लेनदेन का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा संभाल रहा है और प्रतिदिन करीब 25 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है।

समावेशन से समृद्धि की ओर बढ़ रहा भारत

अपने संबोधन के अंत में SBI चेयरमैन ने कहा कि भारत ने पहले ही यह साबित कर दिया है कि बड़े पैमाने पर वित्तीय और सामाजिक समावेशन संभव है। अब अगला लक्ष्य इस समावेशन को व्यापक समृद्धि में बदलना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन यह दुनिया की सबसे आकर्षक विकास कहानियों में से एक है। इस परिवर्तन की यात्रा में बैंकिंग क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार बनेगा।

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Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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