Indian Economy : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट (RBI annual report) के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था में कई चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के मजबूत वृहद आर्थिक आधार, सरकार का लगातार पूंजीगत व्यय और कंपनियों व बैंकिंग क्षेत्र की बेहतर वित्तीय स्थिति आने वाले वर्षों में विकास दर को सहारा देंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची ऊर्जा कीमतों, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने स्थिरता बनाए रखी है। बैंकिंग क्षेत्र के मजबूत बैलेंस शीट और कंपनियों की बेहतर वित्तीय सेहत ने भी आर्थिक विकास को गति दी है।
वैश्विक जोखिम और भू-राजनीतिक तनाव
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि वर्ष 2026 में भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक आर्थिक विकास के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। खासकर पश्चिम एशिया में फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए संघर्ष का असर वैश्विक विकास और महंगाई के अनुमानों पर पड़ रहा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि यह संघर्ष लंबा चलता है, तो इसका नकारात्मक असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर और अधिक गहरा हो सकता है। हालांकि, मध्यम वैश्विक वृद्धि के बीच भी भारत की विकास संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।
व्यापार समझौतों से मिल सकता है फायदा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत द्वारा प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ किए जा रहे विभिन्न व्यापार समझौते आने वाले समय में आर्थिक विकास को और गति दे सकते हैं। इन समझौतों से निर्यात बढ़ने और वैश्विक बाजारों में भारत की हिस्सेदारी मजबूत होने की संभावना है।
कृषि क्षेत्र और मानसून पर निर्भरता
आरबीआई ने कृषि क्षेत्र के भविष्य को लेकर भी अहम टिप्पणी की है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में कृषि उत्पादन काफी हद तक दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति और उसके वितरण पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो की संभावना कृषि उत्पादन के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, क्योंकि इससे बारिश कम या असमान हो सकती है। हालांकि, हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) की सकारात्मक स्थिति इस नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकती है और बारिश में सुधार ला सकती है।
महंगाई पर नियंत्रण की उम्मीद
आरबीआई ने अनुमान जताया है कि पर्याप्त खाद्यान्न भंडार, जलाशयों में अच्छा जल स्तर और स्थिर कृषि उत्पादन के चलते 2026-27 में मुद्रास्फीति यानी महंगाई निर्धारित लक्ष्य के भीतर रह सकती है। हालांकि, अल नीनो की स्थिति और अधिक गर्मी जैसी परिस्थितियां कुछ दबाव पैदा कर सकती हैं, लेकिन सरकार की भंडारण और आपूर्ति प्रबंधन नीतियां इन जोखिमों को नियंत्रित करने में मदद करेंगी। केंद्र सरकार ने आरबीआई के साथ सलाह के बाद तय किया है कि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक महंगाई का लक्ष्य 4 प्रतिशत रखा जाएगा, जिसमें 2 प्रतिशत की घट-बढ़ की सीमा भी होगी।
डिजिटल मुद्रा और नई तकनीकों पर फोकस
आरबीआई अपनी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के परीक्षणात्मक उपयोग को और बढ़ाने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य इसे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं और खुदरा भुगतान प्रणाली में अधिक उपयोगी बनाना है। इसके साथ ही, आरबीआई वित्तीय परिसंपत्तियों के टोकनाइजेशन और अधिक प्रतिभागियों को शामिल करने के लिए नए पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने पर भी विचार कर रहा है। इसका लक्ष्य वित्तीय प्रणाली को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।
कुल मिलाकर, आरबीआई की रिपोर्ट संकेत देती है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और आने वाले वर्षों में भी विकास की रफ्तार बनाए रखने की क्षमता रखती है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और जलवायु संबंधी जोखिमों पर लगातार निगरानी और नीतिगत सतर्कता जरूरी होगी।
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