India-USA Commercial Dialogue: सेमीकंडक्टर सेक्टर में सप्लाई चेन और उससे जुड़े इकोसिस्टम को डेवलप करने के लिए भारत ने लंबी छलांग लगाई है। शुक्रवार को भारत और अमेरिका ने एक अहम समझौता किया है। वाणिज्यिक वार्ता के लिए भारत दौरे पर आईं अमेरिकी वाणिज्य मंत्री जीना रायमोंडो और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मसौदा पत्र (MOU) पर हस्ताक्षर किए।
समझौते से पहले अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने कहा था कि भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपार संभावनाए हैं। कई अमेरिकी कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर पार्ट की सप्लाई चेन में नए अवसरों को तलाश रही हैं। ऐसे में भारत और अमेरिका मिलकर इस दिशा में नए सहयोग स्थापित कर सकते हैं।
समझौते से क्या हासिल होगा
अमेरिका और भारत के बीच हुए समझौते से दोनों देश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कॉमर्शियल संभावानों को बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही भारत में सेमीकंडक्टर का इको सिस्टम कैसे विकसित किया जाय और निजी निवेश कैसे बढ़ाया जाय, इन सबके लिए यह समझौता नए रास्ते खोलेगा। इसके अलावा दोनों देश शॉर्ट टर्म और लांग टर्म रणनीतिक अवसरों को भी तलाश करेंगे। इसके जरिए रिसर्च, कौशल विकास में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।
भारत अमेरिका का 9 वां बड़ा पार्टनर
भारत अमेरिका का 9 वां सबसे बड़ा पार्टनर है। वहीं अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। साथ ही अमेरिका भारत के लिए तीसरा सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करने वाला देश है। दोनों देशों के बीच पिछले 8 साल में कारोबार डबल हुआ है। साल 2022 में दोनों देश के बीच 180 अरब डॉलर का कारोबार हुआ।कोविड और दूसरी परिस्थितियों की वजह से साल 2019 के बाद से भारत और अमेरिका के बीच इस स्तर की पहली वाणिज्यिक वार्ता हुई है। ऐसे में यह समझौता दोनों देशों के लिए बेहद मायने रखता है।
