India US Trade Deal : अमेरिका ने भारत के साथ चल रही व्यापार समझौते की बातचीत को करीब-करीब पूरा होने की स्थिति में बताया है। अमेरिकी राजदूत सेर्गियो गोर (Sergio Gor) ने कहा है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील का करीब 99% हिस्सा तय हो चुका है और सिर्फ 1% मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता आने वाले कुछ हफ्तों में साइन हो सकता है। गोर ने यह बात दिल्ली स्थित आईआईटी में एक कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और अब अंतिम चरण में है।
अमेरिकी टीम का भारत दौरा
अमेरिकी व्यापार वार्ताकारों की एक टीम 1 से 4 जून के बीच भारत आएगी। यह टीम दोनों देशों के बीच चल रहे इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट (अंतरिम व्यापार समझौते) को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत करेगी। इससे पहले भारतीय टीम अप्रैल में वॉशिंगटन गई थी, जहां कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी। अब दोनों पक्ष अंतिम बिंदुओं पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि समझौता जल्द पूरा हो सके।
दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार
सेर्गियो गोर ने बताया कि पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार काफी तेजी से बढ़ा है। पहले यह करीब 20 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर 220 अरब डॉलर से भी ज्यादा हो गया है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी को दिखाती है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि भारत उनके सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में से एक है और भविष्य में यह संबंध और मजबूत होंगे।
टेक्नोलॉजी, AI और नए क्षेत्रों पर फोकस
गोर ने कहा कि दोनों देश अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नई तकनीकों पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, दवाइयों का उत्पादन, डिजिटल व्यापार और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में इन क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के लिए बड़े अवसर पैदा करेगा।
कृषि और घरेलू उद्योगों पर चिंता
हालांकि बातचीत आसान नहीं रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार भारत अपनी कृषि और घरेलू उद्योगों के हितों की सुरक्षा को लेकर सतर्क है। भारत किसी भी ऐसे समझौते के लिए तैयार नहीं है जो किसानों या स्थानीय उत्पादकों के लिए नुकसानदायक हो। इसलिए कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है, जिन्हें अंतिम 1% कहा जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति और दबाव
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस डील को जल्दी पूरा करना चाहता है। इसका एक कारण राजनीतिक भी माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका में आने वाले महीनों में मिड-टर्म चुनाव होने हैं। इसी बीच चीन के साथ व्यापार वार्ताओं में ज्यादा प्रगति न होने के कारण भी अमेरिका भारत के साथ डील को तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है।
भविष्य की रणनीतिक साझेदारी
सेर्गियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर तकनीक, निवेश और सुरक्षा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ेगा। भारत और अमेरिका के बीच यह प्रस्तावित व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में है। अगर यह डील सफलतापूर्वक साइन हो जाती है, तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
