Rare Earth Magnets: सरकार ने देश में दुर्लभ खनिज चुंबक (रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट या आरईपीएम) बनाने के लिए एक नई योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) क्षमता वाले विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए 7,280 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक भारी उद्योग मंत्रालय ने इस योजना के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इसमें विशेष रूप से नियोडिमियम-आयरन-बोरोन (एनडीएफईबी) चुंबक बनाने वाली एकीकृत इकाइयों को शामिल किया गया है। बोली से पहले एक बैठक 7 अप्रैल को आयोजित होगी। बोली जमा करने की अंतिम तारीख 28 मई 2026 है, जबकि तकनीकी बोलियां 29 मई को खोली जाएंगी। बोली प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी और इसे केंद्रीय सार्वजनिक खरीद मंच के माध्यम से पारदर्शी न्यूनतम लागत प्रणाली के तहत संचालित किया जाएगा। इसमें दो चरण होंगे, तकनीकी बोली और वित्तीय बोली।
योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में पूर्ण घरेलू मूल्य श्रृंखला विकसित करना है। इसका मतलब है कि कच्चे एनडीपीआर ऑक्साइड से लेकर तैयार चुंबक उत्पादन तक सब कुछ देश में ही होगा। इससे देश की चीन पर आयात निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक दुर्लभ खनिज बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभर सकेगा।
लाभार्थियों को मिलने वाले प्रोत्साहन
योजना के तहत चुने गए लाभार्थियों को दो तरह के प्रोत्साहन मिलेंगे। पूंजी अनुदान और बिक्री-आधारित प्रोत्साहन। पूंजी अनुदान के लिए 750 करोड़ रुपये और बिक्री-आधारित प्रोत्साहन के लिए 6,450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हर लाभार्थी को 600 एमटीपीए से 1,200 एमटीपीए तक की उत्पादन क्षमता दी जाएगी, जो 100 एमटीपीए के गुणकों में होगी। इसके अलावा तीन सबसे कम बोली लगाने वालों को इंडिया लिमिटेड (आईआरईएल) से एनडीपीआर ऑक्साइड की सीमित आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी। इससे प्रमुख कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
आरईपीएम के महत्व
दुर्लभ खनिज, खासकर एनडीएफईबी चुंबक, कई महत्वपूर्ण उद्योगों में इस्तेमाल होते हैं। इनमें विद्युत वाहन, पवन टरबाइन, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, अंतरिक्ष और रक्षा उद्योग शामिल हैं। इन चुंबकों की घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ने से इन क्षेत्रों में देश की आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री की मंजूरी
यह योजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल ने पिछले साल नवंबर में मंजूरी दी थी। सरकार की यह पहल देश में एकीकृत आरईपीएम सुविधाओं की कुल 6,000 एमटीपीए उत्पादन क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखती है।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति
इस योजना से भारत केवल अपने घरेलू उद्योगों की जरूरत पूरी नहीं करेगा, बल्कि वैश्विक दुर्लभ खनिज बाजार में भी अपनी पकड़ मजबूत करेगा। भारत में पूरी प्रक्रिया कच्चे माल से लेकर तैयार चुंबक उत्पादन तक स्थानीय रूप से होने से लागत में कमी और आपूर्ति में स्थिरता सुनिश्चित होगी। इस पहल से देश में नई तकनीकी नौकरियों का सृजन भी होगा और उच्च तकनीक वाले उद्योगों के लिए मजबूत आधार तैयार होगा। यह भारत की आर्थिक और तकनीकी क्षमता को भी बढ़ाएगा।
