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अगरबत्तियों पर सरकार का अहम कदम, हानिकारक रसायनों पर लगाया प्रतिबंध, 8000 करोड़ के बाजार को मिलेगा बढ़ावा!

Incense Sticks (Agarbatti) : विश्व में अगरबत्ती का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक भारत ने उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नया गुणवत्ता मानक लागू किया है। इस मानक के तहत अगरबत्ती निर्माण में कुछ हानिकारक कीटनाशक रसायनों का उपयोग प्रतिबंधित किया गया है। इससे लगभग 8,000 करोड़ रुपये के अगरबत्ती बाजार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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अगरबत्तियों के लिए नया बीआईसी मानक, सुरक्षा, बाजार को बढ़ावा (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Incense Sticks (Agarbatti) : भारत दुनिया में अगरबत्ती का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है। अब उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने अगरबत्तियों के लिए एक नया गुणवत्ता मानक लागू किया है। इस नए मानक के तहत अगरबत्ती बनाने में इस्तेमाल होने वाले कुछ हानिकारक कीटनाशक रसायनों और कृत्रिम रसायनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा, बल्कि लगभग 8,000 करोड़ रुपये के अगरबत्ती बाजार को भी मजबूती मिलेगी।

नया मानक: आईएस 19412:2025

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, अगरबत्तियों के लिए अलग से भारतीय मानक “आईएस 19412:2025” तैयार किया गया है। यह मानक उपभोक्ता सुरक्षा, घर के अंदर वायु गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण और नियामकीय अनुपालन को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें उन रसायनों और सुगंधित यौगिकों को भी शामिल किया गया है, जिन पर पहले से ही कई देशों में प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

बीआईएस चिन्ह से बढ़ेगा भरोसा

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक सरकार ने बताया कि जो अगरबत्तियां इस नए मानक का पालन करेंगी, वे भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का मानक चिन्ह प्राप्त कर सकेंगी। इससे उपभोक्ताओं को यह पहचानने में आसानी होगी कि कौन सा उत्पाद सुरक्षित और गुणवत्ता के अनुरूप है। बीआईएस चिन्ह उपभोक्ताओं के बीच विश्वास बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

निषिद्ध रसायनों की लिस्ट तय

बीआईएस ने अगरबत्ती निर्माण में इस्तेमाल न किए जाने वाले पदार्थों की एक स्पष्ट सूची भी जारी की है। इसमें एलेथ्रिन, पर्मेथ्रिन, साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन और फिप्रोनिल जैसे कीटनाशक रसायन शामिल हैं। इसके अलावा बेंजिल सायनाइड, एथिल एक्रिलेट और डाइफिनाइल एमीन जैसे कुछ कृत्रिम सुगंध मध्यवर्ती रसायनों पर भी रोक लगाई गई है। मंत्रालय के अनुसार, ये पदार्थ मानव स्वास्थ्य, घर के अंदर की हवा और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।

अगरबत्तियों का नया वर्गीकरण

नए गुणवत्ता मानक के तहत अगरबत्तियों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। मशीन से बनी अगरबत्तियां, हाथ से बनी अगरबत्तियां और पारंपरिक मसाला अगरबत्तियां। इस मानक में कच्चे माल की गुणवत्ता, जलने की क्षमता, सुगंध की प्रभावशीलता और रासायनिक मानकों से जुड़ी स्पष्ट शर्तें तय की गई हैं, ताकि हर उपभोक्ता को सुरक्षित और समान गुणवत्ता वाला उत्पाद मिल सके।

कारीगरों और उद्योग को फायदा

मंत्रालय का कहना है कि इस कदम से उपभोक्ता विश्वास बढ़ेगा, नैतिक और टिकाऊ विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और पारंपरिक कारीगरों को भी समर्थन मिलेगा। साथ ही, भारतीय अगरबत्ती उद्योग की वैश्विक बाजारों तक पहुंच और मजबूत होगी।

निर्यात में भारत की मजबूत स्थिति

भारत का अगरबत्ती उद्योग करीब 8,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें से हर साल करीब 1,200 करोड़ रुपये मूल्य की अगरबत्तियों का निर्यात किया जाता है। भारत अमेरिका, मलेशिया, नाइजीरिया, ब्राजील और मेक्सिको सहित 150 से अधिक देशों को अगरबत्तियां भेजता है। नया गुणवत्ता मानक भारतीय अगरबत्तियों की अंतरराष्ट्रीय साख को और बेहतर बनाने में मदद करेगा।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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