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अब 3.75 लाख करोड़ डॉलर की भारतीय इकोनॉमी,आगे की रेस में जापान-जर्मनी से टक्कर

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Jun 12, 2023, 01:58 PM IST

India GDP Has Reached At 3.75 Trillion Dollar:दुनिया की बड़ी इकोनॉमी वाले देशों को देखा जाय तो 5 लाख करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंचने के लिए भारत की जापान और जर्मनी से रेस है। ताजा आंकड़ों के अनुसार मौजूद करंट प्राइस पर इस समय जापान की इकोनॉमी 5 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी बनने के सबसे करीब है।

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भारतीय इकोनॉमी की अहम उपलब्धि

India GDP Has Reached At 3.75 Trillion Dollar:भारतीय इकोनॉमी ने एक और उपलब्धि हासिल कर ली है। दुनिया की 5 वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी अब 3.75 लाख करोड़ डॉलर की हो गई है। वित्त मंत्रालय ने ट्वीट के जरिए यह जानकारी साझा की है। मोदी सरकार साल 2025 तक भारतीय इकोनॉमी को 5 लाख करोड़ डॉलर बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। और अगर ऐसा होता है तो भारत दुनिया के चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा। अभी यह माइलस्टोन अमेरिका और चीन ही हासिल कर पाए हैं।

मोदी सरकार के दौर में 1.75 लाख करोड़ बढ़ी इकोनॉमी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आफिस द्वारा ट्वीट की गई जानकारी के अनुसार भारत की GDP 3.75 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गई है। जो कि 2014 में करीब 2 लाख करोड़ डॉलर थी। ट्वीट में यह भी लिखा गया है कि भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी से 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन गया है। भारत को अब दुनिया में ब्राइट स्पॉट कहा जा रहा है।

जापान,जर्मनी और भारत में कौन निकलेगा आगे

दुनिया की बड़ी इकोनॉमी वाले देशों को देखा जाय तो 5 लाख करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंचने के लिए भारत की जापान और जर्मनी से रेस है। ताजा आंकड़ों के अनुसार करंट प्राइस के आधार पर इस समय जापान की इकोनॉमी 5 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी बनने के सबसे करीब है। जापान की इकोनॉमी इस समय 4.41 लाख करोड़ रुपये की है। वहीं उसके पीछे जर्मनी की इकोनॉमी है जो कि 4.30 लाख करोड़ रुपये की है। जबकि भारत की इकोनॉमी 3.75 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। ऐसे में भारत को अगर इनसे पहले पहुंचना है तो कहीं ज्यादा तेज गति से ग्रोथ करना होगा।

अमेरिका- चीन बेहद आगे

वहीं अगर अमेरिका और चीन की इकोनॉमी को देखा जाय तो भारत से कहीं ज्यादा आगे हैं। जहां अमेरिका ने 5 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी की हैसियत साल 1978 में हासिल कर ली थी, वहीं चीन ने 2009 में ऐसा कारनामा कर दिखाया था। इस समय अमेरिका की इकोनॉमी 26.85 लाख करोड़ डॉलर की है। जबकि चीन की इकोनॉमी 19.37 लाख करोड़ की है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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