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India GDP: 55 अरब डॉलर की बन सकती है भारतीय इकोनॉमी, चाहिए 8 फीसदी की ग्रोथ रेट

India GDP: भारत की अर्थव्यवस्था असंगठित से संगठित की तरफ जा रही है। इस समय भारत की दो-तिहाई अर्थव्यवस्था असंगठित क्षेत्र में है। वर्ल्ड बैंक का डेटा दिखाता है कि 2014 के बाद से नई फर्म की संख्या में वृद्धि हुई है, जिसके कारण भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उद्यम इकोसिस्टम बन पाया है।

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जीडीपी ग्रोथ में तेजी

India GDP:भारतीय अर्थव्यवस्था 2047 तक बढ़कर 55 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, लेकिन इसके लिए भारत को 8 फीसदी की वार्षिक विकास दर आने वाले वर्षों में हासिल करनी होगी। यह लक्ष्य काफी महत्वाकांक्षी है लेकिन प्राप्त किया जा सकता है। आईएमएफ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कृष्णमूर्ति वी सुब्रमण्यन ने यह बात कही है। उन्होंने आगे कहा कि मिडिल-इनकम के जाल से बाहर निकलने के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वृद्धि दर काफी आवश्यक है।

नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन में तेजी

एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 8 प्रतिशत की विकास दर को प्राप्त किया जा सकता है। देश की डेमोग्राफी और सरकार की ओर से किए जा रहे नीतिगत सुधारों के कारण पिछले 10 वर्षों में विकास दर तेज रही है।उन्होंने आगे कहा कि अगर हम उद्यमिता की बात करें तो वर्ल्ड बैंक का डेटा दिखाता है कि 2014 के बाद से नई फर्म की संख्या में वृद्धि हुई है, जिसके कारण भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उद्यम इकोसिस्टम बन पाया है। इससे औपचारिक क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने में सफलता मिली है।

उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था असंगठित से संगठित की तरफ जा रही है। भारत की दो-तिहाई अर्थव्यवस्था असंगठित है। असंगठित क्षेत्र की फर्म में संगठित की अपेक्षा कम उत्पादकता होती है।

इनकम बढ़ाने के लिए मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस

वर्ल्ड बैंक का दावा है कि भारत को अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय के एक-चौथाई हिस्से तक पहुंचने में 75 वर्ष का समय लगेगा। इस पर आईएमएफ के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मिडिल इनकम की परिभाषा काफी बड़ी है। अगर भारत अपनी जीडीपी प्रति व्यक्ति आय को दो, तीन या चार गुना तक बढ़ाता है तो भी वह मिडिल-इनकम देश ही रहेगा।उन्होंने आगे कहा कि मिडिल-इनकम के जाल से बाहर निकलने के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वृद्धि दर काफी आवश्यक है।

पिछले महीने आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के लक्ष्य को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया था। इसकी वजह देश में निजी खपत (विशेषकर ग्रामीण भारत में) का बढ़ना था।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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